जब कुंडली के किसी भी भाव में देवगुरु बृहस्पति और राहु (Jupiter and Rahu) एक साथ बैठते हैं, तो चांडाल दोष (Chandal Dosh) का निर्माण होता है। गुरु ज्ञान और नैतिकता (Knowledge and Ethics) के प्रतीक हैं, जबकि राहु भ्रम और अनैतिकता (Confusion and Immorality) का कारक है। इस युति के कारण जातक की बुद्धि भ्रष्ट हो सकती है और वह गलत संगति (Bad Company) में पड़ सकता है। गुरु का शुभ प्रभाव राहु की छाया से दब जाता है, जिससे व्यक्ति के चरित्र और प्रतिष्ठा (Character and Reputation) पर आंच आती है।
करियर (Career) के क्षेत्र में चांडाल दोष जातक को अभिमानी और अति-महत्वाकांक्षी (Arrogant and Over-ambitious) बना देता है। इसके कारण व्यक्ति जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में गैर-कानूनी या अनैतिक कार्यों (Illegal or Unethical Acts) की ओर आकर्षित होता है। उच्च शिक्षा और ज्ञान (Higher Education and Knowledge) प्राप्त करने में निरंतर बाधाएं आती हैं। गुरु की कृपा न होने से जातक को उचित मार्गदर्शन (Proper Guidance) नहीं मिल पाता, जिससे उसका पेशेवर जीवन (Professional Life) अंधकारमय हो जाता है।
सामाजिक जीवन (Social Life) में ऐसा व्यक्ति अक्सर विवादों का केंद्र बना रहता है। अपनी कटु वाणी और दूसरों के प्रति अनादर (Disrespect) के कारण वह अपने शुभचिंतकों को खो देता है। धर्म और परंपराओं (Religion and Traditions) के प्रति नास्तिकता या गलत धारणाएं विकसित होना भी चांडाल दोष (Chandal Dosh) का एक लक्षण है। गुरु के पीड़ित होने से समाज में मिलने वाला सम्मान (Respect) कम हो जाता है। यह दोष जातक को वैचारिक रूप से अस्थिर (Ideologically Unstable) बना देता है।
निवारण के लिए गुरु मंत्र का जाप (Chanting Guru Mantra) और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की उपासना अत्यंत आवश्यक है। गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं (Yellow Items) जैसे चने की दाल, केला या सोने का दान करना शुभ फल देता है। राहु की शांति के लिए शिव चालीसा का पाठ और माथे पर केसर का तिलक (Saffron Tilak) लगाना बुद्धि को शुद्ध करता है। अपने गुरुओं और शिक्षकों (Teachers and Mentors) का सम्मान करना इस दोष के प्रभाव को जड़ से मिटाने की शक्ति रखता है।
जातक को अपनी निर्णय लेने की क्षमता (Decision-making Ability) पर काम करना चाहिए और कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए। आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन (Study of Spiritual Texts) और सत्संग में शामिल होना मन को भटकने से रोकता है। चांडाल दोष (Chandal Dosh) का प्रभाव कम होने पर बृहस्पति की शुभता वापस आती है और व्यक्ति ज्ञानवान तथा धनवान (Wise and Wealthy) बनता है। सही दिशा में किए गए प्रयास ही आपके भाग्य को बदलने का सामर्थ्य (Power) रखते हैं।