चंद्रमा को मन का कारक (Significator of Mind) माना जाता है, इसलिए यदि मन विचलित रहता हो तो प्रतिदिन माता के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माता की सेवा करने से चंद्रमा की शुभता (Auspiciousness) में वृद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। घर की उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West Direction) को साफ रखने से भी चंद्र दोष का निवारण होता है।
पूर्णिमा (Full Moon) के दिन चंद्र देव को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य देना एक अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और दान पुण्य करने से मानसिक तनाव (Mental Stress) कम होता है। सफेद वस्तुओं जैसे चावल (Rice), चीनी, दूध और सफेद वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को करना चाहिए।
शिवलिंग पर नियमित रूप से जल और दूध चढ़ाना चंद्रमा को बलिष्ठ करने का सबसे उत्तम मार्ग है। भगवान शिव (Lord Shiva) ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, अतः उनकी आराधना से चंद्र जनित कष्टों का शमन होता है। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है।
चांदी के पात्र (Silver Vessel) का उपयोग करना चंद्रमा के लिए विशेष लाभकारी होता है। रात के समय चांदी के गिलास में पानी भरकर रखें और सुबह उसका सेवन करें। यह विधि न केवल ज्योतिषीय रूप से सहायक है, बल्कि स्वास्थ्य (Health) की दृष्टि से भी शरीर को शीतलता प्रदान करती है और क्रोध पर नियंत्रण (Control on Anger) रखने में मदद करती है।
नकारात्मक विचारों से बचने के लिए मोती रत्न (Pearl Gemstone) धारण करना भी एक प्रचलित उपाय है। हालांकि, इसे पहनने से पहले कुंडली का विश्लेषण कराना आवश्यक है। चंद्रमा को जल का स्वामी माना जाता है, इसलिए बहते पानी या नदी में नारियल (Coconut) प्रवाहित करने से भी राहु-चंद्र की युति या ग्रहण दोष (Eclipses Defects) के बुरे प्रभावों में कमी आती है।