जब किसी जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह कमजोर या नीच राशि में होता है, तो व्यक्ति को बोलने (Speech Problems) में कठिनाई महसूस हो सकती है। वह अपनी बातों को दूसरों के सामने स्पष्ट रूप से नहीं रख पाता और अक्सर हकबकाहट (Stammering) का शिकार हो जाता है। आत्मविश्वास की कमी के कारण वह सार्वजनिक मंचों (Public Speaking) पर जाने से डरता है। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा (Social Reputation) पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कमजोर बुध त्वचा रोगों (Skin Diseases) का मुख्य कारण बनता है। खुजली, एलर्जी या चेहरे पर दाग-धब्बे होना खराब बुध की निशानी है। इसके साथ ही नसों की कमजोरी (Nervous System) और बुद्धि का भ्रमित होना भी इसी ग्रह के दोष हैं। व्यक्ति को अक्सर भूलने की बीमारी (Forgetfulness) हो जाती है और वह छोटी-छोटी गणनाओं (Calculations) में भी गलतियां करने लगता है।
नीच का बुध व्यक्ति की सूंघने की शक्ति (Sense of Smell) को भी प्रभावित कर सकता है। पाचन तंत्र (Digestive System) में गड़बड़ी और आंतों से जुड़ी समस्याएं भी बुध के पीड़ित होने पर उत्पन्न होती हैं। यदि किसी व्यक्ति को अक्सर दांतों की समस्या (Dental Issues) रहती है, तो यह भी कमजोर बुध का एक लक्षण माना जाता है। ऐसे जातकों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।
मानसिक स्तर पर पीड़ित बुध व्यक्ति को चालाक और धोखेबाज भी बना सकता है। वह दूसरों को ठगने की योजनाएं बनाने लगता है, जिससे अंततः उसे स्वयं ही भारी नुकसान (Financial Loss) उठाना पड़ता है। व्यापार में बार-बार घाटा होना और साझेदारी (Partnership) में विवाद होना भी खराब बुध के संकेत हैं। व्यक्ति की तर्कशक्ति (Reasoning Power) कमजोर हो जाती है जिससे वह गलत निवेश (Wrong Investment) कर बैठता है।
इन दोषों से मुक्ति के लिए फिटकरी (Alum) से दांत साफ करना और गले में तांबे का सिक्का (Copper Coin) धारण करना लाभदायक होता है। सोने के आभूषण (Gold Jewellery) पहनना भी बुध की ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है। नियमित रूप से योग (Yoga) और प्राणायाम करना मस्तिष्क की नसों को शांति प्रदान करता है। बुध को प्रसन्न करने के लिए झूठ बोलने से बचना चाहिए और अपनी बहन या बुआ (Aunt) के साथ संबंध मधुर रखने चाहिए।