शनि जयंती का दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए साल का सबसे बड़ा अवसर होता है। इस दिन काले चने (Black Gram) और गुड़ का प्रसाद बांटना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। जो जातक इस दिन चमड़े के जूतों (Leather Shoes) का दान किसी जरूरतमंद बुजुर्ग को करते हैं, उनके जीवन से कठिन संघर्ष समाप्त होने लगते हैं। शनि देव सेवा भाव से सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं।
कंबल (Blanket) का दान, विशेषकर काले या नीले रंग का, शनिवार के दिन करने से राहु और शनि दोनों के दोष शांत होते हैं। सर्दियों के मौसम में निर्धन लोगों को गर्म कपड़े बांटना शनि की साढ़े साती के कष्टों को हर लेता है। यह दान कर्म व्यक्ति के भाग्य (Fortune) के बंद दरवाजे खोलता है और उसे मानसिक शांति प्रदान करता है। दान हमेशा गुप्त रूप से करना अधिक फलदायी होता है।
छाया पात्र दान (Shadow Donation) शनि पूजा का एक विशिष्ट हिस्सा है। एक कांसे के बर्तन में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को दान कर दें। यह उपाय असाध्य रोगों (Incurable Diseases) से मुक्ति दिलाने और अकाल मृत्यु के भय को टालने के लिए किया जाता है। तेल का दान करने से शनि देव की क्रूर दृष्टि शांत होती है और जातक को सुरक्षा कवच प्राप्त होता है।
पक्षियों को काले तिल और बाजरा खिलाना भी शनि ग्रह को अनुकूल बनाने का एक सहज तरीका है। शनिवार को चींटियों को आटा और चीनी खिलाने से कर्ज (Debt Relief) से मुक्ति मिलती है और अटके हुए सरकारी काम पूरे होते हैं। शनि देव को मेहनत का प्रतीक माना जाता है, इसलिए दान के साथ-साथ किसी लाचार व्यक्ति की शारीरिक सेवा करना भी सबसे बड़ी पूजा मानी गई है।
तांबे के बजाय लोहे की वस्तुओं (Iron Objects) का दान शनिवार को करना चाहिए। शनि देव को अर्पित किया गया सिंदूर और तेल जातक के आत्मविश्वास (Self-Confidence) को बढ़ाता है। जो लोग नियमित रूप से दान-पुण्य करते हैं और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दूसरों की भलाई में लगाते हैं, उन पर शनि की साढ़े साती का प्रभाव भी शुभ फल देने वाला बन जाता है। शनि देव केवल दंडदाता ही नहीं, बल्कि परम रक्षक (Protector) भी हैं।