केतु की महादशा (Ketu Mahadasha) के दौरान व्यक्ति अक्सर भ्रम की स्थिति (State of Confusion) में रहता है। जातक को ऐसा महसूस हो सकता है कि समाज और परिवार से उसका मोहभंग हो रहा है। केतु एक छाया ग्रह (Shadow Planet) है जो व्यक्ति को एकांत (Isolation) की ओर धकेलता है। इस समय में व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) कमजोर हो जाती है और वह छोटी-छोटी बातों पर चिंतित रहने लगता है।
स्वास्थ्य (Health) की दृष्टि से देखा जाए तो केतु त्वचा रोगों (Skin Diseases) और नसों की कमजोरी (Weakness of Nerves) का कारण बन सकता है। केतु को 'जहर' का कारक भी माना गया है, इसलिए इस दौरान संक्रमण (Infection) और रक्त विकारों की संभावना बढ़ जाती है। व्यक्ति को पैरों में दर्द और जोड़ों की समस्या (Joint Pain) का सामना करना पड़ सकता है। केतु की महादशा में चोट लगने या दुर्घटना (Accidents) का भय भी बना रहता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से केतु की दशा काफी उतार-चढ़ाव वाली होती है। जातक को अचानक धन हानि (Financial Loss) हो सकती है या बना-बनाया काम बिगड़ सकता है। केतु मोक्ष का कारक है, इसलिए यह व्यक्ति को भौतिक सुखों (Materialistic Comforts) से दूर करने का प्रयास करता है। व्यवसाय (Business) में साझेदारी में विवाद होने की संभावना रहती है, जिससे मानसिक तनाव (Mental Stress) और भी अधिक बढ़ जाता है।
सामाजिक जीवन में केतु के प्रभाव से व्यक्ति के गुप्त शत्रु (Hidden Enemies) सक्रिय हो जाते हैं। लोग आपके विरुद्ध षड्यंत्र रच सकते हैं जिससे आपकी प्रतिष्ठा (Reputation) को ठेस पहुँच सकती है। व्यक्ति का झुकाव तंत्र-मंत्र और गुप्त विधाओं (Occult Sciences) की ओर बढ़ सकता है। यदि केतु कुंडली में शुभ स्थिति में हो, तो यह महादशा अचानक आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth) और अंतर्ज्ञान (Intuition) प्रदान करती है।
केतु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सात्विक जीवनशैली (Sattvic Lifestyle) अपनानी चाहिए। नशा और तामसिक भोजन का त्याग करने से केतु की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में मुड़ती है। मंदिर में जाकर माथा टेकना और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। नियमित रूप से हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से भी केतु जनित भय और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है।