चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं (Emotions) का स्वामी है, इसलिए इसकी दस वर्ष की महादशा व्यक्ति को अत्यंत संवेदनशील बना देती है। इस दौरान जातक को अक्सर मानसिक अवसाद (Depression) और निर्णय लेने में दुविधा का सामना करना पड़ सकता है। चंद्रमा की महादशा (Moon Mahadasha) को संतुलित करने के लिए सोमवार (Monday) का व्रत रखना और भगवान शिव (Lord Shiva) का अभिषेक करना सर्वोत्तम उपाय है।
चांदी के गिलास (Silver Glass) में पानी पीना और माता की सेवा करना चंद्रमा को बलवान बनाता है। जो लोग अपनी माँ (Mother) का सम्मान करते हैं, उन्हें मानसिक शांति (Mental Peace) स्वतः प्राप्त होती है। पूर्णिमा (Full Moon) के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना और कुछ समय चाँदनी में बैठना स्नायु तंत्र (Nervous System) को शीतलता प्रदान करता है। इससे रात में आने वाले बुरे सपनों और अनिद्रा (Insomnia) से मुक्ति मिलती है।
सफेद वस्तुओं का दान जैसे दूध, चावल (Rice) और सफेद मोती चंद्रमा की शांति के लिए श्रेष्ठ हैं। चंद्रमा की महादशा (Moon Mahadasha) में जातक को पानी और तरल पदार्थों (Fluids) का अधिक सेवन करना चाहिए। एकादशी (Ekadashi) का व्रत रखना भी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि मन बहुत अधिक अशांत हो, तो चांदी का कड़ा (Silver Bangle) हाथ में पहनना एक सुरक्षा कवच (Protection Shield) की तरह कार्य करता है।
शुद्ध मोती रत्न (Pearl Gemstone) को चांदी की अंगूठी में कनिष्ठा उंगली (Little Finger) में धारण करना चाहिए। यह रत्न क्रोध (Anger) को शांत करता है और एकाग्रता (Concentration) को बढ़ाता है। चंद्रमा की महादशा (Moon Mahadasha) के दौरान जातक को एकांत (Isolation) से बचकर परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। शिव चालीसा (Shiv Chalisa) का पाठ करना भय और असुरक्षा की भावना को जड़ से समाप्त कर देता है।
वास्तु (Vastu) के अनुसार घर की उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West) को दोषमुक्त रखना चंद्रमा को प्रसन्न करता है। रात के समय दूध का सेवन न करना और ठंडी चीजों से परहेज करना भी स्वास्थ्य (Health) के लिए आवश्यक है। चंद्रमा की महादशा (Moon Mahadasha) व्यक्ति को कला और साहित्य (Literature) की ओर ले जाती है, इसलिए किसी रचनात्मक शौक (Creative Hobby) को अपनाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान सिद्ध होता है।