शनि देव को कानून और न्याय (Law and Justice) का कारक माना जाता है, इसलिए साढ़ेसाती के दौरान अदालती मामलों (Court Cases) और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। यदि जातक सत्य के मार्ग पर है, तो शनि देव की कृपा से उसे शत्रुओं (Enemies) पर निश्चित रूप से विजय प्राप्त होती है। इस समय में विजय पाने के लिए शनिवार के दिन 'शनि वज्र पंजर स्तोत्र' (Shani Vajra Panjar Stotra) का पाठ करना एक अभेद्य सुरक्षा तंत्र (Security System) की तरह काम करता है। यह स्तोत्र जातक के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उसे निडर बनाता है।
शत्रु बाधा (Enemy Obstacles) को दूर करने के लिए शनिवार की रात को एक काले कपड़े में सवा किलो काले तिल और एक लोहे की कील बांधकर अपने सिर के ऊपर से सात बार वारकर किसी सुनसान स्थान (Isolated Place) पर दबा देना चाहिए। यह टोटका गुप्त शत्रुओं (Hidden Enemies) की चालों को नाकाम करने में अत्यंत प्रभावशाली है। शनि दोष (Shani Dosha) के दौरान जातक को वाद-विवाद (Arguments) से बचना चाहिए और अपनी वाणी पर संयम (Control on Speech) रखना चाहिए। सत्य बोलना शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अस्त्र है।
अदालती कार्यवाही (Court Proceedings) में सफलता के लिए तांबे के एक सिक्के (Copper Coin) में छेद करके उसे काले धागे में पिरोकर गले में धारण करना चाहिए। यह उपाय जातक के प्रभाव मंडल (Influence Zone) को बढ़ाता है और न्यायाधीश (Judge) के समक्ष उसकी बातों को वजन प्रदान करता है। शनिवार के दिन सुंदरकांड (Sundarkand) का सामूहिक पाठ करवाना शत्रुओं के दमन और संकटों के निवारण के लिए सुप्रसिद्ध है। हनुमान जी का बल और शनि देव का न्याय मिलकर जातक को हर परिस्थिति में विजेता (Winner) बनाते हैं।
शनि की साढ़ेसाती (Shani Sadesati) के समय यदि कोई व्यक्ति आपको बेवजह परेशान कर रहा हो, तो शनिवार को उड़द की दाल के 21 दाने (21 Grains of Black Gram) लेकर उस पर शत्रु का नाम लेकर जमीन में गाड़ दें। यह क्रिया शत्रु की बुद्धि को भ्रमित कर उसे आपके प्रति शांत कर देती है। जातक को चाहिए कि वह इस समय में धैर्य (Patience) न खोए और कानून का सम्मान (Respect for Law) करे। शनि देव न्यायप्रिय व्यक्ति की रक्षा स्वयं आगे बढ़कर करते हैं और उसे समाज में सम्मान दिलाते हैं।
भोजन में काली मिर्च (Black Pepper) और काला नमक (Black Salt) का प्रयोग करना शनि की ऊर्जा को संतुलित करने का एक सहज तरीका है। शनि दोष (Shani Dosha) के दौरान जातक को अपने गुरु (Mentor) का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए, क्योंकि गुरु की दृष्टि शनि के विष को अमृत में बदल देती है। इन उपायों और टोटकों का पालन करने से न केवल शत्रुओं पर विजय मिलती है, बल्कि जातक का आत्मबल (Willpower) भी सुदृढ़ होता है। शनि की कृपा से अंततः सत्य की ही जीत होती है और जातक को न्याय (Justice) प्राप्त होता है।