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अग्नि पूजन (Agni Poojan) के दौरान परिक्रमा (Circumambulation) करना सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया (Religious Action) मानी जाती है। शास्त्रानुसार होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करना अत्यंत कल्याणकारी (Beneficial) होता है। परिक्रमा शुरू करने से पहले हाथ में जल और 'पीली सरसों' (Yellow Mustard) लेकर संकल्प (Resolution) लें। प्रत्येक फेरे के साथ 'नारायण कवच' (Narayan Kavach) या 'विष्णु सहस्रनाम' (Vishnu Sahasranamam) का मानसिक जाप करना मन को स्थिरता प्रदान करता है। परिक्रमा हमेशा 'घड़ी की दिशा' (Clockwise Direction) में ही करनी चाहिए ताकि ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का सही लाभ मिल सके।

परिक्रमा (Circumambulation) के दौरान 'कच्चा सूत' (Raw Cotton Thread) होलिका के चारों ओर लपेटना घर की सुरक्षा (Protection) और लंबी उम्र का प्रतीक है। इस समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (Om Namo Bhagavate Vasudevaya) मंत्र का उच्चारण करना सबसे उत्तम माना गया है। अग्नि की तपन से बचने के लिए उचित दूरी बनाए रखें और पैरों में 'हवाई चप्पल' (Flip-flops) के स्थान पर नंगे पैर रहना अधिक पारंपरिक माना जाता है, हालांकि जमीन गर्म होने पर 'कॉटन मोजे' (Cotton Socks) पहने जा सकते हैं। यह शारीरिक और मानसिक अनुशासन (Discipline) का एक सुंदर मेल है।

फेरे लेते समय हाथ में 'गेहूं की बालियां' (Wheat Ears) या चने की टहनी रखना नई फसल के स्वागत (Welcoming New Crop) का संकेत है। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद अग्नि को जल का अर्घ्य (Water Offering) दें और भूमि को स्पर्श कर आशीर्वाद लें। कई लोग इस समय 'शिव चालीसा' (Shiv Chalisa) का भी पाठ करते हैं क्योंकि अग्नि को महादेव (Lord Shiva) का ही एक रूप माना जाता है। अपनी सुविधा के लिए आप 'डिजिटल मंत्र चैंटर' (Digital Mantra Chanter) का उपयोग कर सकते हैं जिससे निरंतर ध्वनि बनी रहे। यह अभ्यास आपके चित्त को शुद्ध (Pure Consciousness) करने में मदद करता है।

नियमों (Rules) की बात करें तो परिक्रमा के दौरान किसी से अनावश्यक बातें न करें और मन को पूरी तरह भक्ति (Devotion) में लीन रखें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर परिक्रमा करें तो आपसी प्रेम और भाईचारा (Brotherhood) बढ़ता है। यदि संभव हो तो 'हाथ से बने दीये' (Handmade Lamps) का प्रयोग करें और प्लास्टिक जैसी वस्तुओं को अग्नि से दूर रखें। अग्नि पूजन (Agni Poojan) के इस समय में 'मौन व्रत' (Vow of Silence) धारण करना आंतरिक शांति (Internal Peace) के लिए बहुत प्रभावी होता है। यह परंपरा हमें धैर्य और संयम (Patience and Restraint) का पाठ पढ़ाती है।

परिक्रमा (Circumambulation) समाप्त होने पर होलिका माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि (Wealth and Happiness) की प्रार्थना करें। इस दौरान 'सफेद चंदन' (White Sandalwood) का तिलक माथे पर लगाना मन को ठंडा रखता है। अग्नि की राख (Ashes) को परिक्रमा के बाद माथे पर लगाना सौभाग्य (Good Fortune) का प्रतीक है। इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक उपकरणों जैसे 'पोर्टेबल मिनी स्पीकर' (Portable Mini Speaker) से भक्ति संगीत बजाकर और भी दिव्य बनाया जा सकता है। यह आध्यात्मिक क्रिया आपके जीवन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश (Light) की ओर ले जाती है।

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अग्नि पूजन (Agni Poojan) के दौरान परिक्रमा (Circumambulation) करना सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया (Religious Action) मानी जाती है। शास्त्रानुसार होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करना अत्यंत कल्याणकारी (Beneficial) होता है। परिक्रमा शुरू करने से पहले हाथ में जल और 'पीली सरसों' (Yellow Mustard) लेकर संकल्प (Resolution) लें। प्रत्येक फेरे के साथ 'नारायण कवच' (Narayan Kavach) या 'विष्णु सहस्रनाम' (Vishnu Sahasranamam) का मानसिक जाप करना मन को स्थिरता प्रदान करता है। परिक्रमा हमेशा 'घड़ी की दिशा' (Clockwise Direction) में ही करनी चाहिए ताकि ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का सही लाभ मिल सके।

परिक्रमा (Circumambulation) के दौरान 'कच्चा सूत' (Raw Cotton Thread) होलिका के चारों ओर लपेटना घर की सुरक्षा (Protection) और लंबी उम्र का प्रतीक है। इस समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (Om Namo Bhagavate Vasudevaya) मंत्र का उच्चारण करना सबसे उत्तम माना गया है। अग्नि की तपन से बचने के लिए उचित दूरी बनाए रखें और पैरों में 'हवाई चप्पल' (Flip-flops) के स्थान पर नंगे पैर रहना अधिक पारंपरिक माना जाता है, हालांकि जमीन गर्म होने पर 'कॉटन मोजे' (Cotton Socks) पहने जा सकते हैं। यह शारीरिक और मानसिक अनुशासन (Discipline) का एक सुंदर मेल है।

फेरे लेते समय हाथ में 'गेहूं की बालियां' (Wheat Ears) या चने की टहनी रखना नई फसल के स्वागत (Welcoming New Crop) का संकेत है। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद अग्नि को जल का अर्घ्य (Water Offering) दें और भूमि को स्पर्श कर आशीर्वाद लें। कई लोग इस समय 'शिव चालीसा' (Shiv Chalisa) का भी पाठ करते हैं क्योंकि अग्नि को महादेव (Lord Shiva) का ही एक रूप माना जाता है। अपनी सुविधा के लिए आप 'डिजिटल मंत्र चैंटर' (Digital Mantra Chanter) का उपयोग कर सकते हैं जिससे निरंतर ध्वनि बनी रहे। यह अभ्यास आपके चित्त को शुद्ध (Pure Consciousness) करने में मदद करता है।

नियमों (Rules) की बात करें तो परिक्रमा के दौरान किसी से अनावश्यक बातें न करें और मन को पूरी तरह भक्ति (Devotion) में लीन रखें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर परिक्रमा करें तो आपसी प्रेम और भाईचारा (Brotherhood) बढ़ता है। यदि संभव हो तो 'हाथ से बने दीये' (Handmade Lamps) का प्रयोग करें और प्लास्टिक जैसी वस्तुओं को अग्नि से दूर रखें। अग्नि पूजन (Agni Poojan) के इस समय में 'मौन व्रत' (Vow of Silence) धारण करना आंतरिक शांति (Internal Peace) के लिए बहुत प्रभावी होता है। यह परंपरा हमें धैर्य और संयम (Patience and Restraint) का पाठ पढ़ाती है।

परिक्रमा (Circumambulation) समाप्त होने पर होलिका माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि (Wealth and Happiness) की प्रार्थना करें। इस दौरान 'सफेद चंदन' (White Sandalwood) का तिलक माथे पर लगाना मन को ठंडा रखता है। अग्नि की राख (Ashes) को परिक्रमा के बाद माथे पर लगाना सौभाग्य (Good Fortune) का प्रतीक है। इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक उपकरणों जैसे 'पोर्टेबल मिनी स्पीकर' (Portable Mini Speaker) से भक्ति संगीत बजाकर और भी दिव्य बनाया जा सकता है। यह आध्यात्मिक क्रिया आपके जीवन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश (Light) की ओर ले जाती है।
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