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झारखंड में आंगनवाड़ी सहायिका (Anganwadi Helper) के चयन की प्रक्रिया पूर्णतः लोकतांत्रिक (Democratic) और स्थानीय भागीदारी पर आधारित होती है। रिक्त पदों (Vacant Posts) के लिए सबसे पहले बाल विकास परियोजना अधिकारी (Child Development Project Officer - CDPO) के माध्यम से विज्ञापन (Advertisement) निकाला जाता है। यह विज्ञापन स्थानीय अखबारों और प्रखंड कार्यालय (Block Office) के सूचना पट्ट पर चस्पा किया जाता है। योग्य इच्छुक महिलाएं अपना आवेदन पत्र (Application Form) प्रखंड कार्यालय में जमा करती हैं।

आवेदन प्राप्त होने के बाद, संबंधित वार्ड या गाँव में एक आम सभा (General Body Meeting) बुलाई जाती है। इस आम सभा का आयोजन मुखिया (Village Head) और विभाग के पर्यवेक्षकों (Supervisors) की उपस्थिति में किया जाता है। सभा में आवेदिकाओं की शैक्षणिक योग्यता (Academic Qualification) और स्थानीय निवास (Local Residence) की पुष्टि की जाती है। आम सभा का मुख्य उद्देश्य समुदाय के सामने सबसे योग्य और सेवाभावी महिला का चयन (Selection) करना है ताकि किसी भी प्रकार का पक्षपात (Partiality) न हो सके।

चयन के लिए मेधा अंक (Merit Marks) की गणना की जाती है, जिसमें 10वीं और 12वीं के अंकों को आधार बनाया जाता है। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो अधिक उम्र (Older Age) वाली महिला को वरीयता दी जाती है। सहायिका पद के लिए विधवाओं (Widows) और निराश्रित महिलाओं (Destitute Women) को चयन में विशेष प्राथमिकता (Special Priority) देने का सरकारी प्रावधान है। यह नीति समाज के वंचित वर्गों (Vulnerable Sections) को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक कदम है।

चयनित उम्मीदवार की सूची जिला समाज कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer - DSWO) के पास अनुमोदन (Approval) के लिए भेजी जाती है। सभी दस्तावेजों (Documents) के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद ही नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी किया जाता है। नियुक्त होने के बाद, सहायिका को एक निश्चित प्रशिक्षण (Training) अवधि से गुजरना होता है, जहाँ उसे बच्चों की देखभाल और पोषण संबंधी बारीकियों को सिखाया जाता है।

यदि चयन प्रक्रिया के विरुद्ध कोई शिकायत (Complaint) होती है, तो उसके लिए अपील (Appeal) करने का भी विकल्प होता है। उपायुक्त (Deputy Commissioner) कार्यालय में ऐसी शिकायतों की जाँच की जाती है और गड़बड़ी पाए जाने पर चयन रद्द (Cancelled) कर दोबारा प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। झारखंड में इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल (Online Portal) के विकास पर भी काम चल रहा है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों की महिलाएं भी आसानी से आवेदन कर सकें।

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झारखंड में आंगनवाड़ी सहायिका (Anganwadi Helper) के चयन की प्रक्रिया पूर्णतः लोकतांत्रिक (Democratic) और स्थानीय भागीदारी पर आधारित होती है। रिक्त पदों (Vacant Posts) के लिए सबसे पहले बाल विकास परियोजना अधिकारी (Child Development Project Officer - CDPO) के माध्यम से विज्ञापन (Advertisement) निकाला जाता है। यह विज्ञापन स्थानीय अखबारों और प्रखंड कार्यालय (Block Office) के सूचना पट्ट पर चस्पा किया जाता है। योग्य इच्छुक महिलाएं अपना आवेदन पत्र (Application Form) प्रखंड कार्यालय में जमा करती हैं।

आवेदन प्राप्त होने के बाद, संबंधित वार्ड या गाँव में एक आम सभा (General Body Meeting) बुलाई जाती है। इस आम सभा का आयोजन मुखिया (Village Head) और विभाग के पर्यवेक्षकों (Supervisors) की उपस्थिति में किया जाता है। सभा में आवेदिकाओं की शैक्षणिक योग्यता (Academic Qualification) और स्थानीय निवास (Local Residence) की पुष्टि की जाती है। आम सभा का मुख्य उद्देश्य समुदाय के सामने सबसे योग्य और सेवाभावी महिला का चयन (Selection) करना है ताकि किसी भी प्रकार का पक्षपात (Partiality) न हो सके।

चयन के लिए मेधा अंक (Merit Marks) की गणना की जाती है, जिसमें 10वीं और 12वीं के अंकों को आधार बनाया जाता है। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो अधिक उम्र (Older Age) वाली महिला को वरीयता दी जाती है। सहायिका पद के लिए विधवाओं (Widows) और निराश्रित महिलाओं (Destitute Women) को चयन में विशेष प्राथमिकता (Special Priority) देने का सरकारी प्रावधान है। यह नीति समाज के वंचित वर्गों (Vulnerable Sections) को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक कदम है।

चयनित उम्मीदवार की सूची जिला समाज कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer - DSWO) के पास अनुमोदन (Approval) के लिए भेजी जाती है। सभी दस्तावेजों (Documents) के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद ही नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी किया जाता है। नियुक्त होने के बाद, सहायिका को एक निश्चित प्रशिक्षण (Training) अवधि से गुजरना होता है, जहाँ उसे बच्चों की देखभाल और पोषण संबंधी बारीकियों को सिखाया जाता है।

यदि चयन प्रक्रिया के विरुद्ध कोई शिकायत (Complaint) होती है, तो उसके लिए अपील (Appeal) करने का भी विकल्प होता है। उपायुक्त (Deputy Commissioner) कार्यालय में ऐसी शिकायतों की जाँच की जाती है और गड़बड़ी पाए जाने पर चयन रद्द (Cancelled) कर दोबारा प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। झारखंड में इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल (Online Portal) के विकास पर भी काम चल रहा है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों की महिलाएं भी आसानी से आवेदन कर सकें।
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