यहाँ आने वाले लोग सबसे पहले पेंटिंग्स के पुराने natural colors को करीब से देखते हैं। ये रंग मिट्टी, पौधों और पत्थरों से बने थे। इसलिए इनका रूप आज भी काफी साफ नजर आता है। पेंटिंग्स की चमक प्राकृतिक दिखती है।
कई दर्शक रंगों के मेल को ध्यान से समझते हैं। रंग हल्के होते हुए भी अपनी पहचान दिखाते हैं। कलाकारों ने हर जगह सही मात्रा का उपयोग किया था। इस वजह से ये चित्र समय के साथ भी मजबूत रहे।
कुछ लोग यह भी नोट करते हैं कि पेंटिंग्स में चमक artificial नहीं बल्कि natural है। यह चमक पत्थर की सतह और रंगों की शुद्धता से आती है। प्राकृतिक प्रकाश इस shine को और सुंदर दिखाता है। यह बात हर यात्री को आकर्षित करती है।
पेंटिंग में इस्तेमाल रंगों के ऊपर वर्षों से कोई chemical नहीं लगाया गया। इसके बावजूद ये इतने सुंदर दिखते हैं कि लोग हैरान रह जाते हैं। यह कला उस समय के ज्ञान को दिखाती है। इससे पता चलता है कि कलाकारों को प्राकृतिक रंगों की अच्छी समझ थी।
लोग इन रंगों में छुपी मेहनत और धैर्य को अनुभव करते हैं। Ancient painting colors केवल देखने की चीज नहीं बल्कि सीखने की चीज हैं। इनका बनना और टिके रहना दोनों अनोखी बातें हैं। अजन्ता की गुफाएँ इस कला को जीवित रखती हैं।