जीवन में आने वाली तनावपूर्ण स्थितियाँ (Stressful Situations) हमारे धैर्य (Patience) और चरित्र का असली परीक्षण करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया (Reaction) देने के बजाय कुछ सेकंड रुकना और गहरी सांस (Deep Breath) लेना आपके मस्तिष्क को शांत कर सकता है। जब हम आवेश में आकर निर्णय लेते हैं, तो अक्सर बाद में पछताना पड़ता है। अपनी भावनाओं (Emotions) को समझना और उन्हें तर्क (Logic) के साथ जोड़ना ही भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) है। विपरीत समय में भी शांत रहना आपको दूसरों से अधिक परिपक्व (Mature) बनाता है।
भावनात्मक नियंत्रण (Emotional Control) पाने के लिए आत्म-चिंतन (Self-reflection) करना बहुत लाभदायक होता है। यह जानने की कोशिश करें कि कौन सी बातें आपको गुस्सा (Anger) दिलाती हैं या आपको विचलित (Distract) करती हैं। अपनी उन कमियों पर काम करना शुरू करें जो आपको कमजोर बनाती हैं। ध्यान (Meditation) का नियमित अभ्यास आपकी तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को मजबूत करता है, जिससे आप कठिन समय में भी विचलित नहीं होते। मन की स्थिरता (Stability of Mind) ही वह ढाल है जो आपको बाहरी दबावों (External Pressures) से बचाती है।
धैर्य रखने का अर्थ यह नहीं है कि आप कुछ न करें, बल्कि यह है कि आप सही समय (Right Time) की प्रतीक्षा करते हुए निरंतर कर्म करें। हर समस्या का समाधान तुरंत नहीं मिलता, कुछ चीजों को सुलझने के लिए समय की आवश्यकता होती है। सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Outlook) बनाए रखना तनाव को कम करने का सबसे अचूक उपाय है। यह सोचें कि यह समय भी बीत जाएगा और हर संकट (Crisis) अपने साथ कुछ न कुछ सीख लेकर आता है। आशावादी (Optimistic) रहना आपकी आंतरिक शक्ति (Inner Strength) को बनाए रखता है।
अपनी समस्याओं को किसी भरोसेमंद मित्र (Trusted Friend) या मार्गदर्शक (Mentor) के साथ साझा करने से मन का बोझ हल्का होता है। कभी-कभी दूसरों का नजरिया (Perspective) हमें समस्या का ऐसा समाधान दिखा देता है जो हम खुद नहीं देख पा रहे थे। तनाव प्रबंधन (Stress Management) की तकनीकों को अपने जीवन में शामिल करें जैसे संगीत सुनना, टहलना या कोई पसंदीदा खेल खेलना। अपने मन को शांत रखने के लिए 'वर्तमान क्षण' (The Now) में रहने का प्रयास करें। बीती बातों का अफसोस और भविष्य की चिंता ही तनाव की मुख्य जड़ (Main Root) है।
क्षमाशीलता (Forgiveness) और सहनशीलता जैसे गुणों को अपनाना आपको मानसिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। दूसरों की गलतियों को पकड़कर बैठने से केवल आपका ही मानसिक नुकसान (Mental Damage) होता है। अपनी सीमाओं (Boundaries) को पहचानें और जरूरत पड़ने पर 'ना' (No) कहना सीखें ताकि आप अतिरिक्त दबाव से बच सकें। खुद के प्रति प्रेम (Self-love) और करुणा रखें और खुद को बहुत अधिक दोष न दें। अटूट धैर्य और भावनाओं पर नियंत्रण ही आपको जीवन के हर युद्ध में विजेता (Winner) बनाएगा।