G-Secs (Government Securities), Corporate Bonds (कॉर्पोरेट बॉन्ड्स), और SDL (State Development Loans) के बीच Risk (जोखिम) का मुख्य अंतर Credit Risk (क्रेडिट जोखिम) या Default Risk (चूक जोखिम) से संबंधित है, जो जारीकर्ता (Issuer) की भुगतान करने की क्षमता (Ability to Pay) पर निर्भर करता है।
G-Secs (सरकारी प्रतिभूतियाँ) Central Government (केंद्र सरकार) द्वारा जारी की जाती हैं। इन्हें भारत में सबसे सुरक्षित Investment माना जाता है क्योंकि Sovereign (संप्रभु) सरकार द्वारा Default (चूक) का Risk लगभग शून्य (Zero) होता है। यह Implied Guarantee (निहित गारंटी) उन्हें Risk-Free Investment के करीब ले जाती है और इसीलिए इनकी Yield आमतौर पर सबसे कम होती है।
SDL (State Development Loans) State Governments (राज्य सरकारों) द्वारा जारी किए जाते हैं। SDL को भी G-Secs के समान ही अत्यधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि Central Government का Implicit Support (निहित समर्थन) होता है, और State Governments भी Default नहीं करती हैं। हालाँकि, सैद्धांतिक रूप से (Theoretically), Central Government की तुलना में State Government में Risk थोड़ा अधिक होता है, इसलिए SDL पर Yield G-Secs की तुलना में थोड़ी अधिक हो सकती है।
Corporate Bonds (कॉर्पोरेट बॉन्ड्स) निजी या सार्वजनिक Corporations (निगमों) द्वारा जारी किए जाते हैं। इनमें Default Risk सबसे अधिक होता है क्योंकि Company की Financial Health (वित्तीय स्वास्थ्य) खराब होने पर वह ब्याज (Interest) या Principal (मूलधन) का भुगतान करने में विफल हो सकती है। Risk के स्तर के आधार पर, Corporate Bonds को Credit Rating Agencies (क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों) द्वारा Rate किया जाता है (AAA सबसे सुरक्षित, D सबसे जोखिम भरा)।
संक्षेप में, G-Secs और SDL Low-Risk, Low-Return (कम जोखिम, कम प्रतिफल) श्रेणी में आते हैं, जबकि Corporate Bonds Company's Credit Rating के आधार पर Low-to-High Risk (कम से उच्च जोखिम) स्पेक्ट्रम पर होते हैं। Investors को Credit Rating और Yield की सावधानीपूर्वक तुलना करके अपनी Risk Appetite के अनुसार Investment चुनना चाहिए।