हाँ, लक्ष्यों (Goals) की योजना (Plan) बनाते समय विफलता (Failure) के बारे में सोचना न केवल उचित (appropriate) है, बल्कि यह रणनीतिक रूप से (Strategically) बहुत महत्वपूर्ण (important) भी है। विफलता (Failure) के बारे में सोचने का मतलब डरना (fear) नहीं है, बल्कि संभावित (potential) समस्याओं (problems) को पहचानना (identify) और उनके लिए पहले से तैयारी (preparation) करना है, जिसे 'जोखिम प्रबंधन' (Risk Management) कहते हैं।
सबसे पहले, विफलता के बारे में सोचने से आप अपनी योजना (Plan) में मौजूद कमजोरियों (Weaknesses) की पहचान कर पाते हैं। जब आप खुद से पूछते हैं कि 'यह लक्ष्य क्यों विफल हो सकता है?' तो आप उन बाधाओं (hurdles) या संसाधनों (resources) की कमी को उजागर (expose) करते हैं जो आपने पहले नज़रअंदाज़ (overlooked) कर दिए थे। इससे आप शुरुआत (start) में ही अपनी रणनीति (strategy) को मजबूत (strengthen) कर सकते हैं।
दूसरा, यह आपको एक 'बैकअप प्लान' (Backup Plan) या 'प्लान बी' (Plan B) बनाने की अनुमति देता है। यदि कोई अप्रत्याशित (unexpected) समस्या (problem) आती है (जैसे वित्तीय संकट - financial crisis या स्वास्थ्य समस्या - health issue), तो आपके पास पहले से ही तैयार वैकल्पिक (alternative) समाधान (solution) होता है। इससे आप निराशा (frustration) में समय बर्बाद (wasting time) करने के बजाय तुरंत (immediately) कार्रवाई (action) कर सकते हैं।
विफलता की योजना बनाना आपको मानसिक रूप से तैयार (mentally prepared) करता है। जब आप जानते हैं कि रास्ते में चुनौतियाँ (challenges) आ सकती हैं, तो आप उनके आने पर चौंकते (shocked) नहीं हैं। यह आपको शांत (calm) रहने और भावनात्मक (emotionally) रूप से ज़्यादा प्रतिक्रिया (overreacting) न देने में मदद करता है।
आप 'प्री-मॉर्टेम' (Pre-mortem) तकनीक का उपयोग कर सकते हैं। कल्पना (imagine) करें कि आपका लक्ष्य 6 महीने बाद पूरी तरह से विफल हो गया है। अब, पीछे मुड़कर (looking back) सोचें कि इसकी विफलता के क्या कारण (reasons) थे। यह आपको सबसे संभावित जोखिमों (most likely risks) पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें अभी (now) से ठीक करने में मदद करता है।