आत्म-मूल्य (Self-Value) को समझना और बढ़ाना आत्म-सम्मान (Self-Esteem) की नींव (Foundation) है। यह जानना कि आप 'पर्याप्त' (Enough) हैं, भले ही आपकी उपलब्धियाँ (Achievements) या बाहरी परिस्थितियाँ (External Circumstances) कुछ भी हों, ही आत्म-मूल्य है।
सबसे पहले, अपनी व्यक्तिगत सीमाओं (Personal Boundaries) को निर्धारित (Set) करें। आत्म-मूल्य का अर्थ है कि आप अपने समय (Time), ऊर्जा (Energy) और भावनाओं (Emotions) का सम्मान (Respect) करते हैं। उन चीज़ों के लिए 'ना' (No) कहना सीखें जो आपके मूल्यों (Values) के अनुरूप (Align) नहीं हैं।
दूसरा, अपनी तुलना (Comparison) दूसरों (Others) से करना बंद करें। सोशल मीडिया (Social Media) पर या वास्तविक जीवन (Real Life) में दूसरों की 'हाइलाइट रील' (Highlight Reel) से अपनी 'पर्दे के पीछे' (Behind the Scenes) की ज़िंदगी की तुलना करना आत्म-मूल्य को खत्म (Destroy) कर देता है। केवल अपने पिछले संस्करण (Previous Version) से अपनी तुलना करें।
अपनी ज़रूरतों (Needs) और इच्छाओं (Wants) का ध्यान रखें। आत्म-मूल्य का एक बड़ा हिस्सा आत्म-देखभाल (Self-Care) है। पर्याप्त आराम (Rest) लेना, स्वस्थ (Healthy) भोजन करना, और उन गतिविधियों (Activities) के लिए समय निकालना जो आपको खुशी (Joy) देती हैं, यह दर्शाता है कि आप खुद को महत्वपूर्ण (Important) मानते हैं।
अपनी मूलभूत पहचान (Core Identity) पर ध्यान दें। आपके गुण (Qualities) क्या हैं (जैसे दयालुता-Kindness, ईमानदारी-Honesty, रचनात्मकता-Creativity)? ये गुण आपकी पहचान (Identity) का स्थायी (Permanent) हिस्सा हैं, जबकि नौकरी (Job) या धन (Money) जैसी बाहरी चीज़ें आती-जाती रहती हैं।