सीजीएल परीक्षा (CGL Exam) के बाद नॉर्मलाइज़ेशन (Normalization) की प्रक्रिया (Process) इसलिए ज़रूरी (Necessary) हो जाती है क्योंकि यह परीक्षा (Exam) कई शिफ्टों (Shifts) और कई (Multiple) दिनों (Days) में आयोजित (Conducted) की जाती है। हर शिफ्ट (Shift) में प्रश्न पत्रों (Question Papers) का कठिनाई स्तर (Difficulty Level) एक समान (Uniform) नहीं होता है।
नॉर्मलाइज़ेशन (Normalization) का मुख्य उद्देश्य (Main Purpose) निष्पक्षता (Fairness) सुनिश्चित (Ensure) करना है। यह सुनिश्चित (Ensures) करता है कि किसी भी उम्मीदवार (Candidate) को केवल इसलिए नुकसान (Disadvantaged) या लाभ (Advantaged) न हो कि उसने एक आसान (Easy) या मुश्किल (Difficult) शिफ्ट (Shift) में परीक्षा (Exam) दी थी।
नॉर्मलाइज़ेशन (Normalization) एक सांख्यिकीय प्रक्रिया (Statistical Process) है जिसके तहत (Under Which) सभी उम्मीदवारों (Candidates) के अंकों (Scores) को एक सामान्य (Common) आधार (Base) पर लाया (Brought) जाता है। इस प्रक्रिया (Process) में, अंकों (Scores) की गणना (Calculation) प्रत्येक (Each) शिफ्ट (Shift) के औसत स्कोर (Average Score) और मानक विचलन (Standard Deviation) जैसे कारकों (Factors) के आधार पर की जाती है।
यदि आपकी शिफ्ट (Shift) दूसरों (Others) की तुलना (Comparison) में अधिक (More) मुश्किल (Difficult) थी, तो आपके कच्चे अंक (Raw Marks) बढ़ (Increase) सकते हैं, और इसके विपरीत (Conversely), यदि आपकी शिफ्ट आसान (Easy) थी, तो आपके अंक (Marks) थोड़े (Slightly) कम (Decrease) हो सकते हैं।