भारत में आपातकाल (Emergency) की घोषणा राष्ट्रपति (President) द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति को यह शक्ति भारतीय संविधान के भाग XVIII (Part XVIII) के तहत प्रदान की गई है, जो अनुच्छेद 352 से 360 तक आपातकालीन प्रावधानों (Emergency Provisions) से संबंधित है। राष्ट्रपति देश में तीन (three) प्रकार के आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं, जब विशेष परिस्थितियाँ (special circumstances) उत्पन्न होती हैं।
पहला है राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency), जो अनुच्छेद 352 के तहत घोषित किया जाता है। इसकी घोषणा युद्ध (War), बाहरी आक्रमण (External Aggression) या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है। राष्ट्रपति केवल तभी इसकी घोषणा कर सकते हैं जब उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) से लिखित में सिफारिश (written recommendation) प्राप्त हो। इस घोषणा को एक महीने के भीतर संसद (Parliament) के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित (approved) किया जाना आवश्यक है।
दूसरा है राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (Failure of Constitutional Machinery in a State), जिसे आमतौर पर राष्ट्रपति शासन (President's Rule) कहा जाता है। यह अनुच्छेद 356 के तहत घोषित किया जाता है, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के राज्यपाल (Governor) की रिपोर्ट (report) पर या अन्यथा यह आश्वस्त (satisfied) होते हैं कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम नहीं कर सकती। इसे दो महीने के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।
तीसरा है वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency), जो अनुच्छेद 360 के तहत घोषित किया जाता है। इसकी घोषणा तब की जाती है जब राष्ट्रपति को लगता है कि देश की वित्तीय स्थिरता (financial stability) या साख (credit) खतरे में है। भारत में अभी तक वित्तीय आपातकाल की घोषणा कभी नहीं की गई है। इस घोषणा को भी दो महीने के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित करना आवश्यक है।
आपातकाल की घोषणा के परिणाम (consequences) स्वरूप देश की संघीय संरचना (federal structure) एकात्मक (unitary) हो जाती है, और केंद्र सरकार (Central Government) को राज्य सरकारों (State Governments) पर अधिक शक्ति प्राप्त हो जाती है। यह प्रणाली राष्ट्र की संप्रभुता (sovereignty), एकता (unity) और अखंडता (integrity) की रक्षा के लिए बनाई गई है।