'योग दर्शन' (Yoga Philosophy) के संस्थापक (Founder) भारतीय ऋषि (Sage) महर्षि पतंजलि (Maharishi Patanjali) को माना जाता है। उन्होंने ही 'योग' को एक सुव्यवस्थित (systematic) और दार्शनिक (philosophical) रूप दिया। महर्षि पतंजलि ने दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (2nd century BCE) के आसपास 'योग सूत्र' (Yoga Sutras) नामक एक महत्वपूर्ण ग्रंथ (text) का संकलन (compilation) किया, जिसे योग दर्शन का मूल आधार (fundamental basis) माना जाता है।
योग सूत्र में महर्षि पतंजलि ने योग के सिद्धांतों (principles) और अभ्यास (practice) को 196 संक्षिप्त (concise) सूत्रों में प्रस्तुत किया है। उन्होंने योग को "चित्त वृत्ति निरोध:" के रूप में परिभाषित (defined) किया है, जिसका अर्थ है मन की चंचलता (fluctuations of the mind) का निरोध। योग का अंतिम लक्ष्य (ultimate goal) मुक्ति (liberation) या कैवल्य (Kaivalya) प्राप्त करना है।
पतंजलि ने योग के अभ्यास के लिए एक आठ-अंगीय मार्ग (eight-limbed path) या अष्टांग योग (Ashtanga Yoga) की रूपरेखा (framework) दी है। ये आठ अंग हैं: यम (Yama) (सामाजिक आचार संहिता - social ethics), नियम (Niyama) (व्यक्तिगत अनुशासन - personal discipline), आसन (Asana) (शारीरिक मुद्राएँ - physical postures), प्राणायाम (Pranayama) (श्वास नियंत्रण - breath control), प्रत्याहार (Pratyahara) (इंद्रियों का निग्रह - sense withdrawal), धारणा (Dharana) (एकाग्रता - concentration), ध्यान (Dhyana) (चिंतन - meditation), और समाधि (Samadhi) (परमानंद की स्थिति - state of ecstasy)।
महर्षि पतंजलि का योगदान केवल शारीरिक (physical) व्यायाम (exercise) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहन दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक (psychological) प्रणाली (system) है। यह आत्म-अनुशासन (self-discipline), आत्म-ज्ञान (self-knowledge) और मन तथा शरीर के बीच संतुलन (balance) प्राप्त करने पर ज़ोर देता है।
आज भी, पतंजलि का योग दर्शन भारत और पूरे विश्व में योग के सभी रूपों (forms) और शैलियों (styles) के लिए एक मौलिक मार्गदर्शिका (fundamental guide) बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के माध्यम से, उनकी शिक्षाएँ (teachings) वैश्विक स्तर पर लाखों लोगों के स्वास्थ्य (health) और कल्याण (wellness) में योगदान दे रही हैं।