'हाइड्रोजन बम' (Hydrogen Bomb), जिसे तकनीकी रूप से थर्मोन्यूक्लियर हथियार (Thermonuclear Weapon) भी कहा जाता है, नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के सिद्धांत पर कार्य करता है। नाभिकीय संलयन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के परमाणु नाभिक (light atomic nuclei) एक साथ मिलकर एक भारी नाभिक (heavier nucleus) का निर्माण करते हैं, और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा (energy) जारी होती है।
नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया वही है जो सूर्य (Sun) और अन्य तारों (Stars) को शक्ति (power) प्रदान करती है। हाइड्रोजन बम में, मुख्य संलयन ईंधन (fusion fuel) हाइड्रोजन (Hydrogen) के समस्थानिकों (isotopes), विशेष रूप से ड्यूटेरियम (Deuterium) और ट्रिटियम (Tritium) का उपयोग किया जाता है। संलयन प्रतिक्रिया (fusion reaction) शुरू करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (extremely high temperature) और दाब (pressure) की आवश्यकता होती है।
इस आवश्यक उच्च तापमान को प्राप्त करने के लिए, हाइड्रोजन बम के अंदर एक प्राथमिक खंड (Primary Stage) होता है जो एक छोटा परमाणु विखंडन बम (Atomic Fission Bomb) होता है। यह विखंडन बम पहले विस्फोट (detonation) करता है, जिससे अत्यधिक ऊर्जा, तापमान (लाखों डिग्री सेल्सियस) और दाब उत्पन्न होता है। यह विस्फोट ही संलयन प्रतिक्रिया को शुरू करने के लिए 'ट्रिगर' (trigger) के रूप में कार्य करता है।
विखंडन बम द्वारा उत्पन्न गर्मी (heat) और दाब फिर द्वितीयक खंड (Secondary Stage) में संलयन ईंधन को संपीड़ित (compress) और प्रज्वलित (ignite) करते हैं, जिससे एक अनियंत्रित संलयन प्रतिक्रिया शुरू होती है। इस संलयन से परमाणु विखंडन (fission) की तुलना में कई गुना (many times) अधिक ऊर्जा निकलती है, जिसके कारण हाइड्रोजन बम की विनाशकारी शक्ति (destructive power) परमाणु बम से बहुत अधिक होती है।
हाइड्रोजन बम का विकास शीत युद्ध (Cold War) के दौरान हुआ था। विखंडन बम (परमाणु बम) नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) पर काम करता है, जहाँ एक भारी नाभिक (heavy nucleus) दो छोटे नाभिकों में विभाजित (split) होता है। इसके विपरीत, संलयन (Fusion) हल्के नाभिकों को जोड़ता है। संलयन प्रतिक्रिया की शक्ति और दक्षता (efficiency) ही हाइड्रोजन बम को आज तक का सबसे शक्तिशाली मानव निर्मित विस्फोटक (most powerful man-made explosive) बनाती है।