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सनस्क्रीन (Sunscreen) का सही उपयोग त्वचा को यूवीए (UVA) और यूवीबी (UVB) किरणों से बचाकर समय से पहले बुढ़ापा (प्रीमेच्योर एजिंग), सनबर्न (सनबर्न) और त्वचा कैंसर (स्किन कैंसर) के जोखिम को कम करने के लिए अनिवार्य (कंपलसरी) है।

सही सनस्क्रीन का चुनाव करने के लिए आपको कम से कम एसपीएफ (SPF) 30 या उससे अधिक की आवश्यकता है। एसपीएफ़ केवल यूवीबी किरणों से सुरक्षा को मापता है। यूवीए किरणों से सुरक्षा के लिए, आपको एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम (Broad-Spectrum) सनस्क्रीन चुनना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वह यूवीए और यूवीबी दोनों से बचाता है।

सनस्क्रीन को बाहर निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए। इसे लगाने का सही तरीका है कि चेहरे, गर्दन और शरीर के सभी खुले हिस्सों पर उदारतापूर्वक (जेनरसली) एक पर्याप्त परत (एडिक्वेट लेयर) लगाई जाए। अपर्याप्त मात्रा (इन्सफिशिएंट अमाउंट) में सनस्क्रीन लगाने से उसकी प्रभावशीलता (इफेक्टिवनेस) कम हो जाती है।

सनस्क्रीन को हर दो घंटे में दोबारा (रि-अप्लाई) लगाना बहुत ज़रूरी है, खासकर यदि आप पसीना बहा रहे हैं (स्वीटिंग), तैर रहे हैं (स्विमिंग), या तौलिये से पोंछ रहे हैं (टॉवलिंग) तो। बहुत से लोग सोचते हैं कि सुबह एक बार लगाना काफी है, लेकिन उसका प्रभाव समय के साथ खत्म हो जाता है।

चाहे बादल हों (क्लाउडी) या आप घर के अंदर (इंडोर्स) हों, सनस्क्रीन लगाना आवश्यक है क्योंकि यूवीए किरणें खिड़कियों (विंडोज) और बादलों से गुजर सकती हैं। अपने रोज़ाना की देखभाल दिनचर्या (डेली रूटीन) में सनस्क्रीन को शामिल करना त्वचा को दीर्घकालिक (लॉन्ग-टर्म) लाभ प्रदान करता है।

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सनस्क्रीन (Sunscreen) का सही उपयोग त्वचा को यूवीए (UVA) और यूवीबी (UVB) किरणों से बचाकर समय से पहले बुढ़ापा (प्रीमेच्योर एजिंग), सनबर्न (सनबर्न) और त्वचा कैंसर (स्किन कैंसर) के जोखिम को कम करने के लिए अनिवार्य (कंपलसरी) है।

सही सनस्क्रीन का चुनाव करने के लिए आपको कम से कम एसपीएफ (SPF) 30 या उससे अधिक की आवश्यकता है। एसपीएफ़ केवल यूवीबी किरणों से सुरक्षा को मापता है। यूवीए किरणों से सुरक्षा के लिए, आपको एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम (Broad-Spectrum) सनस्क्रीन चुनना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वह यूवीए और यूवीबी दोनों से बचाता है।

सनस्क्रीन को बाहर निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए। इसे लगाने का सही तरीका है कि चेहरे, गर्दन और शरीर के सभी खुले हिस्सों पर उदारतापूर्वक (जेनरसली) एक पर्याप्त परत (एडिक्वेट लेयर) लगाई जाए। अपर्याप्त मात्रा (इन्सफिशिएंट अमाउंट) में सनस्क्रीन लगाने से उसकी प्रभावशीलता (इफेक्टिवनेस) कम हो जाती है।

सनस्क्रीन को हर दो घंटे में दोबारा (रि-अप्लाई) लगाना बहुत ज़रूरी है, खासकर यदि आप पसीना बहा रहे हैं (स्वीटिंग), तैर रहे हैं (स्विमिंग), या तौलिये से पोंछ रहे हैं (टॉवलिंग) तो। बहुत से लोग सोचते हैं कि सुबह एक बार लगाना काफी है, लेकिन उसका प्रभाव समय के साथ खत्म हो जाता है।

चाहे बादल हों (क्लाउडी) या आप घर के अंदर (इंडोर्स) हों, सनस्क्रीन लगाना आवश्यक है क्योंकि यूवीए किरणें खिड़कियों (विंडोज) और बादलों से गुजर सकती हैं। अपने रोज़ाना की देखभाल दिनचर्या (डेली रूटीन) में सनस्क्रीन को शामिल करना त्वचा को दीर्घकालिक (लॉन्ग-टर्म) लाभ प्रदान करता है।
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