किसी भी रिश्ते (Relationship) में विश्वास (Trust) और ईमानदारी (Honesty) उसकी नींव (Foundation) होते हैं, और इन्हें बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास (Constant effort) की आवश्यकता होती है। विश्वास बनाने का पहला सिद्धांत (Principle) है 'अपने वादों (Promises) को निभाना'। यदि आप कुछ करने का वादा करते हैं, तो उसे ज़रूर पूरा करें। छोटे-छोटे वादे पूरे करने से यह साबित होता है कि आप भरोसेमंद (Reliable) हैं।
ईमानदारी (Honesty) का अर्थ केवल झूठ (Lying) न बोलना नहीं है, बल्कि 'पूरी तरह से खुलापन' (Full transparency) रखना भी है। अपने विचारों (Thoughts), भावनाओं (Feelings), और कार्यों (Actions) को अपने साथी से छिपाएँ (Hide) नहीं। यदि आपको कोई गलती (Mistake) हुई है, तो उसे तुरंत स्वीकार (Admit) करें, इससे पहले कि आपके साथी को किसी और से पता चले। ईमानदार होने पर अस्थायी (Temporary) रूप से दुख हो सकता है, लेकिन यह विश्वास को टूटने से बचाता है।
रिश्ते में विश्वास बनाए रखने के लिए 'गोपनीयता का सम्मान' (Respecting privacy) ज़रूरी है। अपने साथी की व्यक्तिगत चीज़ों (Personal belongings) जैसे फ़ोन (Phone) या ईमेल (Email) को उनकी अनुमति (Permission) के बिना चेक (Check) न करें। विश्वास का मतलब है कि आप मानते हैं कि आपका साथी वफादार (Faithful) है। निरंतर जासूसी (Constant spying) करना विश्वास को कमज़ोर (Weaken) करता है।
'सीमाएं' (Boundaries) निर्धारित करना और उनका सम्मान करना विश्वास का एक और महत्वपूर्ण पहलू (Aspect) है। रिश्ते में आपकी और आपके साथी की क्या अपेक्षाएं (Expectations) हैं, इस बारे में स्पष्ट रूप से बात करें (Clearly communicate)। उदाहरण के लिए, यदि आपका साथी आपसे अपेक्षा करता है कि आप हर दिन एक निश्चित समय पर फ़ोन करें, तो उस सीमा का सम्मान करें। सीमाओं का उल्लंघन (Violation of boundaries) विश्वास को तोड़ता है।
गलतियों (Mistakes) या विश्वासघात (Betrayal) के बाद विश्वास को फिर से बनाने में समय लगता है। यदि विश्वास टूटा है, तो क्षमा (Forgiveness) और लगातार (Consistent) सच्चा व्यवहार (True behavior) ही इसे ठीक कर सकता है। धैर्य (Patience) रखें और अपने साथी को यह दिखाने के लिए लगातार प्रयास करें कि आप बदलने (Change) के लिए प्रतिबद्ध (Committed) हैं।