ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT Platforms) (ओवर-द-टॉप) जैसे नेटफ्लिक्स (Netflix), अमेज़न प्राइम (Amazon Prime), और हॉटस्टार (Hotstar) ने पिछले कुछ वर्षों में फ़िल्म उद्योग (Film Industry) के काम करने के तरीके (Way of working) को मूलभूत (Fundamentally) रूप से बदल दिया है। सबसे बड़ा बदलाव 'वितरण मॉडल' (Distribution model) में आया है। अब फ़िल्मों को रिलीज़ (Release) होने के लिए केवल सिनेमाघरों (Theatres) पर निर्भर (Dependent) नहीं रहना पड़ता है। कई फ़िल्में सीधे ओटीटी (OTT) पर प्रीमियर (Premiere) होती हैं, जिससे वे व्यापक दर्शकों (Wider audience) तक तुरंत पहुँच पाती हैं।
ओटीटी (OTT) ने 'विषय वस्तु' (Content) और 'कहानी कहने' (Storytelling) के तरीके को भी प्रभावित (Affected) किया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platforms) को बॉक्स ऑफिस (Box Office) की चिंता नहीं होती, इसलिए उन्होंने निर्देशकों (Directors) और लेखकों (Writers) को जोखिम भरी (Risky), गैर-पारंपरिक (Non-traditional), और लंबी कहानियाँ (Longer stories) बनाने की स्वतंत्रता (Freedom) दी है, जिन्हें शायद मुख्यधारा (Mainstream) सिनेमा में जगह न मिलती। इससे विभिन्न शैलियों (Different genres) और क्षेत्रीय भाषाओं (Regional languages) की सामग्री (Content) को बढ़ावा मिला है।
इन प्लेटफॉर्म्स ने 'स्टार पावर' (Star Power) के महत्व (Importance) को कम किया है। ओटीटी (OTT) पर दर्शक (Audience) कहानी (Story) और गुणवत्ता (Quality) के आधार पर शो (Show) या फ़िल्म (Film) चुनते हैं, न कि केवल प्रमुख अभिनेता (Lead actor) के नाम पर। इससे नए (New) और प्रतिभा (Talent) वाले अभिनेताओं (Actors), निर्देशकों (Directors), और लेखकों (Writers) को मौका मिला है, जिससे उद्योग में विविधता (Diversity) आई है।
उपभोक्ता व्यवहार (Consumer behavior) में एक महत्वपूर्ण बदलाव (Significant change) आया है। दर्शक अब 'बिंग वॉचिंग' (Binge-watching) (लगातार कई एपिसोड देखना) को प्राथमिकता (Prioritize) देते हैं और वे पारंपरिक (Traditional) टीवी प्रसारण (TV broadcast) समय (Time) का इंतज़ार नहीं करते। ओटीटी (OTT) उन्हें उनकी सुविधानुसार (At their convenience) सामग्री (Content) देखने का नियंत्रण (Control) देता है।
हालाँकि ओटीटी (OTT) ने बहुत लाभ (Benefit) पहुँचाया है, इसने सिनेमाघरों (Theatres) के सामने एक चुनौती (Challenge) भी पेश की है। अब फ़िल्म निर्माताओं को दर्शकों को सिनेमा हॉल तक खींचने (Pull to the cinema hall) के लिए और भी अधिक 'शानदार' (Spectacular) और 'बड़े-पर्दे' (Big-screen) वाले अनुभव बनाने की ज़रूरत है।