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भरोसा किसी भी रिश्ते की रीढ़ है। यदि भरोसा मजबूत है, तो रिश्ता खुद-ब-खुद मजबूत हो जाता है।
भरोसा बढ़ाने के लिए सबसे पहला कदम ईमानदारी है।
सामने वाले से कोई भी छोटी-बड़ी बात न छुपाएँ।
कई बार लोग सोचते हैं कि छोटी बातें छुपाने में क्या हर्ज है, लेकिन यही छोटी बातें बाद में बड़े शक का कारण बनती हैं।

दूसरा, वादे निभाना बेहद जरूरी है।
अगर आपने कहा है कि आप फ़ोन करेंगे, मिलेंगे या कोई काम करेंगे—तो उसे समय पर पूरा करें।
वादे निभाने से सामने वाले को यह विश्वास होता है कि आप उस रिश्ते को महत्व देते हैं।

तीसरा, समय देना और संवेदनशील होना।
जब आप किसी की बात ध्यान से सुनते हैं, उनकी भावनाओं की कद्र करते हैं और ज़रूरत के समय साथ खड़े रहते हैं, तो भरोसा अपने आप गहरा हो जाता है।
भरोसा कोई चीज़ नहीं है जो आप एक बार बना लें और वह हमेशा वैसा ही रहे—उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा कमाना पड़ता है।

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भरोसा किसी भी रिश्ते की रीढ़ है। यदि भरोसा मजबूत है, तो रिश्ता खुद-ब-खुद मजबूत हो जाता है।
भरोसा बढ़ाने के लिए सबसे पहला कदम ईमानदारी है।
सामने वाले से कोई भी छोटी-बड़ी बात न छुपाएँ।
कई बार लोग सोचते हैं कि छोटी बातें छुपाने में क्या हर्ज है, लेकिन यही छोटी बातें बाद में बड़े शक का कारण बनती हैं।

दूसरा, वादे निभाना बेहद जरूरी है।
अगर आपने कहा है कि आप फ़ोन करेंगे, मिलेंगे या कोई काम करेंगे—तो उसे समय पर पूरा करें।
वादे निभाने से सामने वाले को यह विश्वास होता है कि आप उस रिश्ते को महत्व देते हैं।

तीसरा, समय देना और संवेदनशील होना।
जब आप किसी की बात ध्यान से सुनते हैं, उनकी भावनाओं की कद्र करते हैं और ज़रूरत के समय साथ खड़े रहते हैं, तो भरोसा अपने आप गहरा हो जाता है।
भरोसा कोई चीज़ नहीं है जो आप एक बार बना लें और वह हमेशा वैसा ही रहे—उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा कमाना पड़ता है।
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