ऑयली स्किन (Oily Skin) वाले लोग अक्सर यह सोचकर मॉइस्चराइज़र (Moisturizer) लगाने से बचते हैं कि इससे उनकी त्वचा और भी अधिक चिपचिपी (greasy) हो जाएगी, जबकि यह एक बड़ी गलती है। तैलीय त्वचा को भी हाइड्रेशन (hydration) की आवश्यकता होती है, और सही मॉइस्चराइज़र चुनना आवश्यक है ताकि त्वचा तेल उत्पादन (oil production) को नियंत्रित (regulate) कर सके। ऑयली स्किन के लिए सबसे अच्छे मॉइस्चराइज़र वे होते हैं जो नॉन-कॉमेडोजेनिक (non-comedogenic), ऑयल-फ्री (oil-free) और लाइटवेट (lightweight) होते हैं।
नॉन-कॉमेडोजेनिक (non-comedogenic) होने का मतलब है कि मॉइस्चराइज़र आपके पोर्स (pores) को बंद नहीं करेगा, जिससे मुंहासे (acne) और ब्लैकहेड्स (blackheads) होने की संभावना कम हो जाती है। ऑयली स्किन के लिए गाढ़ी क्रीम (heavy creams) की जगह जेल-बेस्ड (gel-based) या वॉटर-बेस्ड (water-based) मॉइस्चराइज़र सबसे बेहतर होते हैं। ये मॉइस्चराइज़र त्वचा को ज़रूरी नमी प्रदान करते हैं बिना किसी भारी या चिकनेपन (greasy feeling) के एहसास के।
मॉइस्चराइज़र में ऐसे तत्व (ingredients) होने चाहिए जो तेल को नियंत्रित (oil control) करने में मदद करें। नियासिनमाइड (Niacinamide), जिसे विटामिन बी3 (Vitamin B3) भी कहा जाता है, एक उत्कृष्ट घटक (excellent ingredient) है जो सीबम (sebum) उत्पादन को कम करने और पोर्स के आकार (pore size) को सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा, हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) एक और अच्छा तत्व है, क्योंकि यह त्वचा को बिना तेल के नमी प्रदान करता है।
ऑयली स्किन के लिए चुने गए मॉइस्चराइज़र में मैटिफाइंग (mattifying) गुण भी होने चाहिए। मैटिफाइंग मॉइस्चराइज़र त्वचा की अतिरिक्त चमक (extra shine) को कम करते हैं और दिन भर त्वचा को मैट फिनिश (matte finish) देते हैं। कुछ मॉइस्चराइज़र में सैलीसिलिक एसिड (Salicylic Acid) भी मिलाया जाता है, जो हल्के मुंहासों (mild acne) से लड़ने में मदद करता है।
मॉइस्चराइज़र को हमेशा क्लींजिंग (cleansing) के बाद नम त्वचा (damp skin) पर लगाना चाहिए। सुबह और रात, दोनों समय इसका इस्तेमाल करें। ऑयली स्किन वाले लोग अक्सर महसूस करते हैं कि मॉइस्चराइज़र की एक पतली परत (thin layer) ही पर्याप्त है। सही मॉइस्चराइज़र का चुनाव करने से त्वचा की नमी का संतुलन (moisture balance) बना रहता है और यह स्वस्थ (healthy) दिखती है, जिससे तेल ग्रंथियाँ (oil glands) ज़्यादा तेल पैदा करने से रुकती हैं।