बच्चों के डर (fears) और चिंताओं (worries) को दूर करने के लिए माता-पिता की ओर से सहानुभूति (empathy), स्वीकृति (acceptance) और समर्थन (support) की आवश्यकता होती है। बच्चों के डर को कभी भी खारिज (dismiss) न करें या उनका मज़ाक (make fun) न उड़ाएँ, भले ही वे आपको मूर्खतापूर्ण (silly) लगें। उनके लिए, वह डर या चिंता वास्तविक (real) होती है।
पहला कदम है बच्चे को यह महसूस कराना कि उनकी भावनाओं को समझा (understood) जा रहा है। आप कह सकते हैं, "मुझे पता है कि तुम अंधेरे (dark) से डर रहे हो, और यह ठीक है।" भावनाओं को स्वीकार करने से बच्चा सुरक्षित महसूस करता है और खुलकर बात करने के लिए तैयार होता है। उन्हें कारण (reason) बताने के लिए प्रोत्साहित करें कि वे किस बात से डरते हैं।
डर को दूर करने के लिए, बच्चों को छोटे-छोटे कदम (small steps) उठाने में मदद करें। उदाहरण के लिए, यदि वे अंधेरे से डरते हैं, तो एक रात की हल्की नाइट लाइट (night light) का उपयोग करें, और धीरे-धीरे उसकी रोशनी कम करें। इसे एक खेल (game) या चुनौती (challenge) के रूप में पेश करें ताकि वे आत्मविश्वास (confidence) महसूस करें जब वे इस पर काबू (overcome) पाते हैं।
बच्चों को डर से निपटने (coping) के लिए टूल (tools) सिखाएँ, जैसे कि गहरी साँस लेने के व्यायाम (deep breathing exercises) या सकारात्मक आत्म-चर्चा (positive self-talk)। उन्हें एक "जादुई कंबल" (magic blanket) या "बहादुर खिलौना" (brave toy) दे सकते हैं जो उन्हें सुरक्षा (protection) की भावना प्रदान करता है। बच्चों को यह विश्वास दिलाएँ कि आप हमेशा उनकी रक्षा (protect) के लिए मौजूद हैं।
यदि चिंताएँ या डर लंबे समय तक (long period) बने रहते हैं और उनके सामान्य जीवन (normal life) को बाधित (disrupt) कर रहे हैं, तो पेशेवर मदद (professional help) लेने में संकोच न करें। एक चाइल्ड काउंसलर (child counsellor) या चिकित्सक (therapist) बच्चों को उनके डर को प्रबंधित (manage) करने के लिए विशिष्ट रणनीतियाँ (specific strategies) सिखा सकता है।