ओटीटी शोज़ (OTT shows) देखने से सोशल लाइफ (social life) यानी सामाजिक जीवन पर नकारात्मक असर (negative impact) पड़ सकता है, खासकर जब यह एक आदत बन जाए और अत्यधिक (excessive) समय इसके पीछे खर्च किया जाए। जब लोग लगातार बिंज वॉचिंग (binge watching) करते हैं, तो वे दोस्तों (friends) और परिवार (family) के साथ वास्तविक जीवन (real life) की बातचीत (interaction) और गतिविधियों (activities) से दूर हो सकते हैं।
सामाजिक अलगाव (social isolation) इसका मुख्य नकारात्मक असर है। व्यक्ति वास्तविक दुनिया (real world) के अनुभवों की जगह स्क्रीन (screen) पर दिखाई जा रही काल्पनिक दुनिया (fictional world) में अधिक समय बिताना शुरू कर देता है। सामाजिक मेलजोल (social gathering) से बचने और घर पर शोज़ देखने को प्राथमिकता (prioritizing) देने से रिश्ते (relationships) कमजोर (weaken) हो सकते हैं।
लंबे समय तक निष्क्रिय (passive) रूप से स्क्रीन देखने से बातचीत कौशल (communication skills) भी प्रभावित हो सकते हैं। जब लोग बातचीत करने के बजाय घंटों तक चुपचाप (quietly) कंटेंट देखते हैं, तो उनका सामाजिक संवाद (social dialogue) करने का अभ्यास कम हो जाता है। इससे उन्हें सामाजिक स्थितियों (social situations) में असहजता (awkwardness) महसूस हो सकती है।
हालांकि, ओटीटी का उपयोग सकारात्मक तरीके से भी किया जा सकता है। शोज़ के बारे में चर्चा (discussing) करना या दोस्तों के साथ एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों (different locations) से एक शो देखना (जिसे ग्रुप वॉच या वॉच पार्टी कहा जाता है) सामाजिक जुड़ाव (social connection) को बढ़ा सकता है। यह लोगों को एक साझा रुचि (shared interest) पर बात करने का मौका देता है।
संतुलन (balance) बनाए रखना महत्वपूर्ण है। मनोरंजन (entertainment) के लिए समय तय करें, लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि आप सामाजिक गतिविधियों (social activities) जैसे बाहर जाना (going out), खेल खेलना (playing sports), या परिवार के साथ समय बिताना (spending time with family) के लिए भी पर्याप्त समय निकाल रहे हैं। अपने स्क्रीन टाइम (screen time) को सीमित (limit) करने से आप अपनी सामाजिक और व्यक्तिगत (personal) दोनों तरह की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।