टी.वी. सीरियल (TV serial) की टी.आर.पी. (TRP - Television Rating Point) रेटिंग टेलीविजन उद्योग (television industry) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण (extremely important) होती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी आय (revenue) और लोकप्रियता (popularity) को प्रभावित करती है। टीआरपी एक ऐसा पैमाना (measure) है जो बताता है कि कितने लोग (कितने दर्शक) किसी विशेष समय (particular time) में किस चैनल (channel) या शो (show) को देख रहे हैं।
टीआरपी रेटिंग का सबसे बड़ा महत्व विज्ञापनदाताओं (advertisers) के लिए है। विज्ञापनदाता किसी शो पर अपने विज्ञापन (advertisements) तभी चलाते हैं जब उसकी टीआरपी अधिक होती है। अधिक टीआरपी का मतलब है अधिक दर्शक (more viewers), और इसलिए, उनके विज्ञापन अधिक लोगों तक पहुँचेंगे। उच्च टीआरपी वाले शो अपने विज्ञापन स्लॉट (ad slots) के लिए अधिक शुल्क (higher fees) लेते हैं।
चैनलों (channels) के लिए, टीआरपी रेटिंग यह निर्धारित (determines) करती है कि कौन से शो सफल (successful) हैं और कौन से नहीं। यदि किसी शो की टीआरपी कम होती है, तो उसे अक्सर जल्दी बंद (cancelled) कर दिया जाता है, भले ही उसकी कहानी (story) अच्छी हो। इसके विपरीत, उच्च टीआरपी वाले शो को नए सीज़न (seasons) या विस्तारित एपिसोड (extended episodes) मिलते हैं।
टीआरपी रेटिंग यह भी तय करती है कि चैनल अपनी प्रोग्रामिंग रणनीति (programming strategy) कैसे बनाते हैं। यह उन्हें बताता है कि किस प्रकार का कंटेंट (content) दर्शकों को पसंद आ रहा है (जैसे पारिवारिक ड्रामा, रियलिटी शो या कॉमेडी)। इस डेटा (data) का उपयोग करके, चैनल ऐसे नए शो बनाने पर निवेश (invest) करते हैं जो सफलता की गारंटी (guarantee success) दे सकें।
यह रेटिंग सिस्टम भारतीय घरों (Indian households) में लगाए गए कुछ चुनिंदा पीपल्स मीटर (People's Meters) के माध्यम से काम करता है। ये मीटर दर्ज (record) करते हैं कि दर्शक कौन सा चैनल देख रहे हैं। हालाँकि इस सिस्टम (system) में कुछ विवाद (controversy) भी रहे हैं, यह अभी भी भारत में टेलीविजन की लोकप्रियता और बाजार मूल्य (market value) को मापने का प्राथमिक तरीका (primary method) है।