विराट कोहली (Virat Kohli) के पिता (Father) का नाम प्रेम कोहली (Prem Kohli) था। उनका पेशा (profession) आपराधिक वकील (Criminal Lawyer) का था और उनका अपने बेटे के क्रिकेट करियर (cricket career) पर अत्यंत महत्वपूर्ण (extremely important) और प्रेरणादायक योगदान (inspirational contribution) रहा है।
प्रेम कोहली (Prem Kohli) ने ही विराट (Virat) की क्रिकेट प्रतिभा (cricket talent) को बचपन (childhood) में पहचाना था और उन्हें नौ साल (nine years) की उम्र में पेशेवर क्रिकेट अकादमी (professional cricket academy) में दाखिला (enrolment) दिलाने का कठिन फैसला (difficult decision) लिया था। वह विराट को हर सुबह (every morning) अपनी स्कूटर (scooter) पर लेकर प्रशिक्षण (training) के लिए जाते थे, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका बेटा (son) अपनी ट्रेनिंग (training) में कोई चूक (no lapse) न करे।
प्रेम कोहली (Prem Kohli) का सबसे बड़ा योगदान (biggest contribution) विराट को सही माहौल (right environment) और समर्थन (support) प्रदान करना था, खासकर जब उनके परिवार (family) के कुछ सदस्यों (members) ने उन्हें केवल पढ़ाई (only studies) पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह (advice) दी थी। उनके पिता ने हमेशा विराट की प्रतिभा (talent) में विश्वास (belief) दिखाया और उन्हें क्रिकेट (cricket) को गंभीरता (seriously) से लेने के लिए प्रोत्साहित (encouraged) किया।
दिसंबर 2006 में प्रेम कोहली (Prem Kohli) का दिल का दौरा (heart attack) पड़ने से निधन (death) हो गया था, जब विराट (Virat) केवल 18 साल (18 years) के थे और दिल्ली (Delhi) के लिए रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) मैच खेल रहे थे। पिता की मृत्यु (father's death) के अगले दिन (next day), विराट ने मैच (match) खेलने का साहसी फैसला (courageous decision) लिया और टीम के लिए एक महत्वपूर्ण पारी (important innings) खेली।
उनके पिता का निधन (death) विराट के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ (biggest turning point) था। उन्होंने बाद में कहा कि उनके पिता की मृत्यु (father's death) ने उन्हें जिम्मेदार (responsible) बनाया और उन्हें हर कीमत पर सफल (successful at all costs) होने के लिए मजबूत (strong) किया, जिससे वह दुनिया के महानतम बल्लेबाज (world's greatest batsman) बनने के अपने पिता के सपने (dream) को पूरा कर सकें।