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संविधान सभा (Constituent Assembly) को बनाने का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र (Sovereign Nation) के रूप में कार्य करने हेतु एक विस्तृत और लिखित संविधान (Constitution) का निर्माण करना था। भारत को ब्रिटिश शासन (British Rule) से स्वतंत्रता मिलने के बाद, देश को चलाने के लिए मौलिक कानूनों (Fundamental Laws) और एक मजबूत राजनीतिक ढांचे (Political Framework) की आवश्यकता थी, और संविधान सभा ने यही कार्य किया।

संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan) की सिफारिशों (Recommendations) के आधार पर जुलाई 1946 में किया गया था। यह सभा भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनाई गई थी, जो भारत की विविध आबादी (Diverse Population) और हितों (Interests) का प्रतिनिधित्व करती थी। इसका कार्य केवल कानून बनाना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि नया संविधान देश के सभी वर्गों (Sections) और समुदायों (Communities) की आकांक्षाओं (Aspirations) और मूल्यों (Values) को प्रतिबिंबित करे।

इस सभा ने लगभग तीन वर्ष (Two Years, Eleven Months, and Eighteen Days) तक काम किया। इस अवधि के दौरान, इसने दुनिया के विभिन्न संविधानों (Constitutions) का अध्ययन किया, व्यापक चर्चाएँ (Extensive Discussions) कीं और कई समितियों (Committees) के माध्यम से काम किया। सबसे महत्वपूर्ण समिति प्रारूपण समिति (Drafting Committee) थी, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) थे, जिन्हें भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार (Chief Architect) भी कहा जाता है।

संविधान सभा (Constituent Assembly) द्वारा अपनाया गया संविधान न केवल एक कानूनी दस्तावेज (Legal Document) था, बल्कि यह भारत के लोगों की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता (Political and Social Commitment) को भी दर्शाता था। इसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी (Socialist), धर्मनिरपेक्ष (Secular), और लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic) बनाने की नींव रखी। सभा ने देश के भविष्य के शासन (Governance) के लिए मार्गदर्शन (Guidance) और नियम स्थापित किए।

संक्षेप में, संविधान सभा (Constituent Assembly) का गठन भारत को स्वतंत्रता (Independence) के बाद एक नया संविधान (New Constitution) प्रदान करने के लिए किया गया था। यह सभा भारत की लोकतांत्रिक (Democratic) आकांक्षाओं का प्रतीक थी जिसने देश के लिए मौलिक कानूनों (Fundamental Laws) का निर्माण किया।

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संविधान सभा (Constituent Assembly) को बनाने का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र (Sovereign Nation) के रूप में कार्य करने हेतु एक विस्तृत और लिखित संविधान (Constitution) का निर्माण करना था। भारत को ब्रिटिश शासन (British Rule) से स्वतंत्रता मिलने के बाद, देश को चलाने के लिए मौलिक कानूनों (Fundamental Laws) और एक मजबूत राजनीतिक ढांचे (Political Framework) की आवश्यकता थी, और संविधान सभा ने यही कार्य किया।

संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan) की सिफारिशों (Recommendations) के आधार पर जुलाई 1946 में किया गया था। यह सभा भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनाई गई थी, जो भारत की विविध आबादी (Diverse Population) और हितों (Interests) का प्रतिनिधित्व करती थी। इसका कार्य केवल कानून बनाना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि नया संविधान देश के सभी वर्गों (Sections) और समुदायों (Communities) की आकांक्षाओं (Aspirations) और मूल्यों (Values) को प्रतिबिंबित करे।

इस सभा ने लगभग तीन वर्ष (Two Years, Eleven Months, and Eighteen Days) तक काम किया। इस अवधि के दौरान, इसने दुनिया के विभिन्न संविधानों (Constitutions) का अध्ययन किया, व्यापक चर्चाएँ (Extensive Discussions) कीं और कई समितियों (Committees) के माध्यम से काम किया। सबसे महत्वपूर्ण समिति प्रारूपण समिति (Drafting Committee) थी, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) थे, जिन्हें भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार (Chief Architect) भी कहा जाता है।

संविधान सभा (Constituent Assembly) द्वारा अपनाया गया संविधान न केवल एक कानूनी दस्तावेज (Legal Document) था, बल्कि यह भारत के लोगों की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता (Political and Social Commitment) को भी दर्शाता था। इसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी (Socialist), धर्मनिरपेक्ष (Secular), और लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic) बनाने की नींव रखी। सभा ने देश के भविष्य के शासन (Governance) के लिए मार्गदर्शन (Guidance) और नियम स्थापित किए।

संक्षेप में, संविधान सभा (Constituent Assembly) का गठन भारत को स्वतंत्रता (Independence) के बाद एक नया संविधान (New Constitution) प्रदान करने के लिए किया गया था। यह सभा भारत की लोकतांत्रिक (Democratic) आकांक्षाओं का प्रतीक थी जिसने देश के लिए मौलिक कानूनों (Fundamental Laws) का निर्माण किया।
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