PM Modi (पीएम मोदी) की सरकार ने Foreign Direct Investment (FDI) नीति में कई बड़े बदलाव किए हैं ताकि देश में Investment (निवेश) के लिए अनुकूल माहौल (Favourable Environment) बनाया जा सके। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य विदेशी Capital (पूँजी) और Technology (प्रौद्योगिकी) को आकर्षित करना है, जिससे Economic Growth (आर्थिक विकास) को गति मिले और Job Creation (रोज़गार सृजन) हो सके। सरकार का Vision (दृष्टिकोण) भारत को एक Global Investment Destination (वैश्विक निवेश गंतव्य) के रूप में स्थापित करना है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक कई क्षेत्रों में FDI (एफडीआई) सीमा को बढ़ाना और स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत Investment (निवेश) की अनुमति देना रहा है। उदाहरण के लिए, Defence (रक्षा), Telecom (दूरसंचार), Aviation (विमानन), Insurance (बीमा) और Retail (खुदरा व्यापार) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में FDI की सीमा बढ़ाई गई है और सरकारी अनुमोदन (Government Approval) की आवश्यकता को कम किया गया है।
इन नीतिगत परिवर्तनों ने Ease of Doing Business (व्यापार करने में आसानी) में सुधार किया है। Automatic Route (स्वचालित मार्ग) का मतलब है कि विदेशी Investors (निवेशकों) को निवेश करने से पहले सरकारी Approval (अनुमोदन) की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे Investment Process (निवेश प्रक्रिया) तेज और सरल हो जाती है। यह Bureaucracy (नौकरशाही) को कम करता है और Confidence (विश्वास) बढ़ाता है।
एक रणनीतिक बदलाव Sensitive Sectors (संवेदनशील क्षेत्रों) में किया गया है, जहाँ भारत के साथ भूमि सीमा (Land Border) साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के लिए अब सरकारी Approval (अनुमोदन) अनिवार्य है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और आर्थिक संप्रभुता (Economic Sovereignty) को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है, विशेष रूप से Opportunistic Takeovers (अवसरवादी अधिग्रहण) को रोकने के लिए।
कुल मिलाकर, FDI Policy (एफडीआई नीति) में किए गए ये बदलाव Pro-Investor (निवेशक-समर्थक) हैं। इन्होंने Foreign Investors (विदेशी निवेशकों) के लिए भारतीय बाजार को अधिक खुला, पारदर्शी (Transparent) और आकर्षक बना दिया है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में देश में FDI Inflows (एफडीआई प्रवाह) में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।