PM Modi (पीएम मोदी) द्वारा 2014 में 'नमामि गंगे कार्यक्रम' (Namami Gange Programme) को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण (Pollution) को प्रभावी ढंग से कम करना, इसका संरक्षण (Conservation) करना और इसे पुनर्जीवित (Rejuvenate) करना था। गंगा नदी को भारत की राष्ट्रीय नदी माना जाता है और यह करोड़ों लोगों की आजीविका (Livelihood) और आस्था (Faith) से जुड़ी है, लेकिन वर्षों से यह गंभीर प्रदूषण का शिकार हो रही थी।
यह कार्यक्रम एक व्यापक और एकीकृत Conservation Mission (संरक्षण मिशन) है जो कई मोर्चों पर काम करता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण फोकस Sewage Treatment Infrastructure (सीवेज उपचार बुनियादी ढाँचे) का विकास करना है। शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage) को नदी में जाने से रोकने के लिए कई नए Sewage Treatment Plants (STPs) का निर्माण किया गया है और पुराने STPs का आधुनिकीकरण (Modernization) किया गया है।
Namami Gange (नमामि गंगे) का दूसरा प्रमुख उद्देश्य औद्योगिक प्रदूषण (Industrial Pollution) पर नियंत्रण करना है। सरकार ने गंगा के किनारे स्थित उद्योगों (Industries) पर सख्त Regulations (विनियमन) लागू किए हैं और उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूर किया है कि वे अपने अपशिष्ट जल (Effluent) को उपचारित (Treat) करने के बाद ही नदी में छोड़ें। Zero Liquid Discharge (ZLD) मानक प्राप्त करने पर जोर दिया गया है।
नदी की पारिस्थितिकी (Ecology) और जैव विविधता (Biodiversity) का संरक्षण भी इस कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग है। इसमें वनीकरण (Afforestation) और नदी के किनारे के क्षेत्रों में जैव विविधता को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा, नदी की सतह की सफाई (River Surface Cleaning) और घाटों के आधुनिकीकरण (Modernization of Ghats) जैसे काम भी किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, 'नमामि गंगे कार्यक्रम' गंगा नदी को साफ करने के लिए एक Mission Mode Project (मिशन मोड परियोजना) है। यह केवल एक Environmental Project (पर्यावरण परियोजना) नहीं है, बल्कि यह गंगा नदी के Cultural (सांस्कृतिक) और Spiritual (आध्यात्मिक) महत्व को बनाए रखते हुए लाखों लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका को सुरक्षित करने का एक प्रयास है।