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Narendra Modi (नरेन्द्र मोदी) का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के एक छोटे से कस्बे वडनगर में हुआ था। उनका परिवार एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि (Simple Background) से था और वे एक छोटे से घर में रहते थे जहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उनके पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। मोदी जी अपने बचपन के दिनों में स्कूल जाने से पहले और बाद में अपने पिता की मदद करने के लिए स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे।

उनका प्रारंभिक जीवन बहुत ही अनुशासित और कठिन परिश्रम वाला था। वडनगर के स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं (Debate Competitions) में बहुत सक्रिय रहते थे और अभिनय का भी शौक रखते थे। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को पढ़ना शुरू किया, जिसका उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे अक्सर स्थानीय पुस्तकालय में घंटों समय बिताते थे और दुनिया भर के महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ते थे।

मोदी जी के भीतर बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजरने वाले सैनिकों की सेवा की और उन्हें चाय और नाश्ता पहुँचाया। उनकी माँ हीराबेन मोदी ने उन्हें सादगी और मेहनत के संस्कार दिए, जिनका पालन वे आज भी करते हैं। वडनगर की तंग गलियों और संघर्षों ने उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाइयों से रूबरू कराया और उन्हें एक मज़बूत नेतृत्वकर्ता (Leader) के रूप में तैयार किया।

युवावस्था में उन्होंने कुछ समय के लिए घर छोड़ दिया और भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की। इस भ्रमण के दौरान वे हिमालय के ऋषियों और मठों में रहे, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिकता और आत्म-खोज (Self-discovery) की ओर कदम बढ़ाया। इन यात्राओं ने उन्हें भारत की विविधता और आम लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझने का अवसर दिया। वडनगर से शुरू हुआ यह सफर केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं बल्कि अटूट संकल्प की मिसाल है।

अपनी यात्रा से वापस लौटने के बाद वे पूरी तरह से जनसेवा में जुट गए। वे जानते थे कि बिना अनुशासन और संगठन के कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उनके जीवन के ये शुरुआती वर्ष ही उनकी भविष्य की राजनीति और 'अंत्योदय' की विचारधारा का आधार बने। वडनगर आज भी उनके संघर्षों और उनकी जड़ों की याद दिलाता है, जहाँ से एक साधारण बालक निकलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधान सेवक (Prime Servant) बना।

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Narendra Modi (नरेन्द्र मोदी) का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के एक छोटे से कस्बे वडनगर में हुआ था। उनका परिवार एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि (Simple Background) से था और वे एक छोटे से घर में रहते थे जहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उनके पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। मोदी जी अपने बचपन के दिनों में स्कूल जाने से पहले और बाद में अपने पिता की मदद करने के लिए स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे।

उनका प्रारंभिक जीवन बहुत ही अनुशासित और कठिन परिश्रम वाला था। वडनगर के स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं (Debate Competitions) में बहुत सक्रिय रहते थे और अभिनय का भी शौक रखते थे। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को पढ़ना शुरू किया, जिसका उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे अक्सर स्थानीय पुस्तकालय में घंटों समय बिताते थे और दुनिया भर के महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ते थे।

मोदी जी के भीतर बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजरने वाले सैनिकों की सेवा की और उन्हें चाय और नाश्ता पहुँचाया। उनकी माँ हीराबेन मोदी ने उन्हें सादगी और मेहनत के संस्कार दिए, जिनका पालन वे आज भी करते हैं। वडनगर की तंग गलियों और संघर्षों ने उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाइयों से रूबरू कराया और उन्हें एक मज़बूत नेतृत्वकर्ता (Leader) के रूप में तैयार किया।

युवावस्था में उन्होंने कुछ समय के लिए घर छोड़ दिया और भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की। इस भ्रमण के दौरान वे हिमालय के ऋषियों और मठों में रहे, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिकता और आत्म-खोज (Self-discovery) की ओर कदम बढ़ाया। इन यात्राओं ने उन्हें भारत की विविधता और आम लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझने का अवसर दिया। वडनगर से शुरू हुआ यह सफर केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं बल्कि अटूट संकल्प की मिसाल है।

अपनी यात्रा से वापस लौटने के बाद वे पूरी तरह से जनसेवा में जुट गए। वे जानते थे कि बिना अनुशासन और संगठन के कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उनके जीवन के ये शुरुआती वर्ष ही उनकी भविष्य की राजनीति और 'अंत्योदय' की विचारधारा का आधार बने। वडनगर आज भी उनके संघर्षों और उनकी जड़ों की याद दिलाता है, जहाँ से एक साधारण बालक निकलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधान सेवक (Prime Servant) बना।
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