बाबा गुरिंदर सिंह जी ढिल्लों के Satsang (सत्संग) का मुख्य सार मानवता और सर्वधर्म समभाव है। वे किसी भी धर्म की आलोचना नहीं करते, बल्कि यह सिखाते हैं कि सभी धर्मों का लक्ष्य एक ही ईश्वर तक पहुँचना है। उनके सत्संग में हर जाति, धर्म और देश के लोग एक साथ बैठकर शांति का संदेश सुनते हैं। बाबा जी के अनुसार, Humanity (मानवता) सबसे बड़ा धर्म है और दूसरों की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
वे अक्सर 'Interfaith Harmony' (अंतरधार्मिक सद्भाव) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न धर्मग्रंथों जैसे आदि ग्रंथ, बाइबल, कुरान और वेदों के उदाहरण देते हैं। वे बताते हैं कि ईश्वर एक है और उसे पाने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। उनके प्रवचनों में संकीर्णता के लिए कोई स्थान नहीं है और वे Universal Brotherhood (विश्व बंधुत्व) के प्रबल समर्थक हैं। यही कारण है कि डेरा व्यास से दुनिया भर के लोग जुड़े हुए हैं।
बाबा जी का कहना है कि हमें पहले एक अच्छा इंसान बनना चाहिए, उसके बाद ही हम अच्छे हिंदू, मुस्लिम या सिख बन सकते हैं। वे कट्टरता और अंधविश्वास के सख्त खिलाफ हैं और हमेशा वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) को अपनाने की बात करते हैं। उनका मानना है कि धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि बांटना। उनकी सरल और स्पष्ट वाणी लोगों के दिलों में आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना पैदा करती है।
सत्संग के दौरान वे 'Social Equality' (सामाजिक समानता) पर बहुत बल देते हैं। डेरे में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, सभी एक ही पंगत में बैठकर लंगर छकते हैं। यह समानता की भावना समाज के भेदभाव को मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाबा जी सिखाते हैं कि Compassion (करुणा) और दया हर इंसान के भीतर होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो। उनके उपदेशों ने लाखों लोगों को नफरत छोड़कर प्रेम का मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
वैश्विक स्तर पर भी बाबा जी का प्रभाव शांति दूत के रूप में है। वे दुनिया के विभिन्न देशों में जाकर लोगों को Mental Peace और आपसी सहयोग का संदेश देते हैं। उनकी विचारधारा में 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना झलकती है। डेरा व्यास का मंच हमेशा शांति और सद्भाव की बात करता है, जो आज के अशांत विश्व के लिए बहुत जरूरी है। मानवता के प्रति उनका यह समर्पण ही उन्हें एक अद्वितीय आध्यात्मिक महापुरुष बनाता है।