शाहरुख खान और गौरी खान की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। इनकी मुलाकात 1984 में दिल्ली की एक पार्टी में हुई थी जब शाहरुख केवल 18 साल के थे। गौरी को देखते ही उन्हें उनसे प्यार हो गया था, लेकिन उस समय वे बहुत शर्मीले स्वभाव के थे। दोनों के बीच लंबी बातचीत के बाद दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।
उस दौर में उनके रिश्ते के सामने सबसे बड़ी बाधा अलग-अलग धर्म का होना था। गौरी एक हिंदू पंजाबी परिवार से थीं और उनके माता-पिता इस शादी के सख्त खिलाफ थे। शाहरुख ने हार नहीं मानी और कई बार नाम बदलकर उनके घर जाने की कोशिश की। एक बार तो गौरी बिना बताए मुंबई चली गई थीं और शाहरुख उन्हें ढूंढने के लिए केवल कुछ रुपयों के साथ मुंबई के हर समुद्र तट पर घूमे थे।
जब शाहरुख ने उन्हें गोराई बीच (Gorai Beach) पर ढूंढ लिया, तो दोनों ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। काफी संघर्ष और पारिवारिक विरोध के बाद आखिरकार 25 अक्टूबर 1991 को उन्होंने शादी कर ली। शादी के शुरुआती दिनों में उनके पास रहने के लिए अपना घर तक नहीं था, लेकिन गौरी ने हर मुश्किल समय में शाहरुख का साथ दिया।
गौरी खान केवल शाहरुख की पत्नी ही नहीं बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत और आलोचक भी हैं। उन्होंने शाहरुख के करियर के उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखा है और हमेशा एक ढाल की तरह खड़ी रही हैं। आज वे एक सफल इंटीरियर डिजाइनर (Interior Designer) हैं और रेड चिलीज एंटरटेनमेंट में पार्टनर भी हैं। उनका वैवाहिक जीवन फिल्म जगत में वफादारी और प्रेम की एक मिसाल माना जाता है।
दोनों के तीन बच्चे हैं—आर्यन, सुहाना और अबराम, जिन्हें वे अपनी सबसे बड़ी दौलत मानते हैं। शाहरुख अक्सर साक्षात्कारों में अपनी सफलता का श्रेय गौरी को देते हैं। मन्नत की भव्यता हो या उनके जीवन की शांति, गौरी ने हर जगह अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह कहानी दर्शाती है कि सच्चा प्यार और समर्पण किसी भी सामाजिक बाधा को पार कर सकता है।