राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC) एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है जिसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Human Rights Act) के तहत की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के प्रत्येक नागरिक के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा (Dignity) से संबंधित अधिकारों की रक्षा करना है। यह आयोग एक प्रहरी (Watchdog) की तरह काम करता है जो सरकारी तंत्र द्वारा अधिकारों के हनन को रोकता है।
आयोग के पास शिकायतों की जांच (Investigation of Complaints) करने के लिए दीवानी न्यायालय (Civil Court) जैसी शक्तियां होती हैं। यह जेलों का दौरा कर सकता है और कैदियों की स्थिति (Condition of Prisoners) में सुधार के लिए सिफारिशें दे सकता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ पुलिस हिरासत (Custodial Violence) में हिंसा होती है या अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो एनएचआरसी (NHRC) स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेकर कार्रवाई शुरू कर सकता है।
मानवाधिकारों की श्रेणी में शिक्षा, स्वास्थ्य और भेदभाव के विरुद्ध अधिकार (Right against Discrimination) भी शामिल हैं। आयोग समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों के हितों के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहता है। यह सरकार को उन कानूनों और नीतियों में संशोधन करने का सुझाव देता है जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों (International Human Rights Treaties) के अनुरूप नहीं होते।
जन जागरूकता (Public Awareness) पैदा करना भी इस संस्था का एक अनिवार्य कार्य है। संगोष्ठियों और प्रकाशनों के माध्यम से यह लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति शिक्षित करता है। हालांकि, आयोग की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी (Binding) नहीं होतीं, लेकिन इनकी नैतिक शक्ति (Moral Authority) इतनी अधिक होती है कि प्रशासन अक्सर इन्हें स्वीकार करता है और आवश्यक सुधार करता है।
न्यायपालिका (Judiciary) के साथ मिलकर एनएचआरसी लोकतंत्र (Democracy) को मजबूत बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि शक्ति का दुरुपयोग न हो और हर नागरिक को त्वरित न्याय (Speedy Justice) प्राप्त हो सके। मानवाधिकारों का सम्मान करना एक सभ्य समाज (Civilized Society) की पहचान है और यह आयोग इस सिद्धांत को धरातल पर उतारने का निरंतर प्रयास कर रहा है।