इस पहेलीनुमा प्रश्न का सही उत्तर सल्फर (Sulphur) है, जिसे गंधक भी कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective) से देखें तो यह तत्व अपने भौतिक और रासायनिक गुणों (Physical and Chemical Properties) के कारण अलग-अलग स्थितियों में भिन्न व्यवहार करता है। जब सल्फर अपनी शुद्ध और ठोस अवस्था (Solid State) में होता है, तो इसका द्रव्यमान (Mass) स्थिर रहता है, लेकिन पर्यावरणीय कारकों के संपर्क में आते ही इसमें बदलाव दिखने लगते हैं।
जब सल्फर को गीला (Wet) किया जाता है, तो इसके घनत्व (Density) और आयतन में परिवर्तन के कारण इसके वजन के मापन (Measurement) में अंतर आ सकता है। हालांकि, यह पहेली भौतिकी के नियमों (Laws of Physics) के बजाय शब्दों के खेल पर अधिक आधारित है। दैनिक जीवन में लोग अक्सर ऐसे गूगली प्रश्न (Googly Questions) तार्किक क्षमता (Logical Reasoning) और मानसिक सतर्कता को परखने के लिए पूछते हैं, जो पहली बार सुनने में असंभव प्रतीत होते हैं।
सबसे रोचक बदलाव तब आता है जब सल्फर को जलाया (Burnt) जाता है। जलने की प्रक्रिया में सल्फर हवा में मौजूद ऑक्सीजन (Oxygen) के साथ रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) करता है। इस ऑक्सीकरण (Oxidation) प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide) गैस बनती है। ऑक्सीजन के परमाणु सल्फर के साथ जुड़ जाते हैं, जिससे प्राप्त उत्पाद का कुल वजन (Total Weight) शुरुआती वजन से अधिक हो जाता है।
द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) यहाँ पूरी तरह लागू होता है। इस नियम के अनुसार, किसी भी बंद तंत्र में पदार्थ न तो पैदा होता है और न ही नष्ट, बल्कि वह एक रूप से दूसरे रूप में बदलता है। जब हम कहते हैं कि जलने पर वजन बढ़ गया, तो वह वास्तव में हवा से ली गई ऑक्सीजन (Oxygen) का अतिरिक्त भार होता है। यह विज्ञान (Science) का एक ऐसा चमत्कार है जो साधारण दिमाग को चकरा सकता है।
इस तरह के प्रश्न न केवल मनोरंजन (Entertainment) प्रदान करते हैं, बल्कि विज्ञान के प्रति जिज्ञासा (Curiosity) भी पैदा करते हैं। स्कूलों और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में भी कई बार ऐसे घुमावदार सवाल पूछे जाते हैं ताकि छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच (Analytical Thinking) का परीक्षण किया जा सके। प्रकृति में मौजूद रसायनों (Chemicals) का यह अनोखा व्यवहार हमें यह सिखाता है कि जो दिखता है, सत्य हमेशा उससे कहीं अधिक गहरा होता है।