आमतौर पर अधिकांश पदार्थ ठंडा होने पर सिकुड़ते (Contract) हैं, लेकिन पानी एक बहुत ही अजीब व्यवहार प्रदर्शित करता है जिसे 'पानी का असंगत विस्तार' (Anomalous Expansion of Water) कहा जाता है। जब पानी 4°C से नीचे ठंडा होना शुरू होता है, तो वह सिकुड़ने के बजाय फैलने (Expand) लगता है। जब पानी पूरी तरह जमकर बर्फ (Ice) बन जाता है, तो उसका आयतन (Volume) लगभग 9 प्रतिशत बढ़ जाता है।
सर्दियों में जब पाइपों के भीतर का पानी जमने लगता है, तो उसे फैलने के लिए जगह की आवश्यकता होती है। चूंकि पाइप (चाहे वे लोहे के हों या पीवीसी के) बहुत सख्त होते हैं और फैल नहीं सकते, इसलिए बर्फ का यह जबरदस्त दबाव पाइप की दीवारों पर पड़ता है। यह दबाव इतना अधिक होता है कि वह मजबूत से मजबूत पाइप को भी बीच से फाड़ देता है।
बर्फ की यह विशेषता जलीय जीवन (Aquatic Life) के लिए जीवनदान है। चूंकि बर्फ का आयतन अधिक होता है, इसलिए इसका घनत्व (Density) कम हो जाता है और यह पानी के ऊपर तैरने लगती है। जमी हुई झीलों के ऊपर बर्फ की एक परत बन जाती है जो नीचे के पानी को जमने से रोकती है, जिससे मछलियां और अन्य जीव कड़ाके की ठंड में भी सुरक्षित रहते हैं।
इंजीनियरिंग की दृष्टि से, ठंडे प्रदेशों में पाइपों को जमीन के काफी नीचे दबाया जाता है या उन पर 'इन्सुलेशन' (Insulation) चढ़ाया जाता है ताकि पानी का तापमान हिमांक (Freezing Point) तक न पहुँचे। इसके अलावा, पुराने जमाने के नलों में थोड़ा पानी टपकने दिया जाता था ताकि पाइप के भीतर पानी का प्रवाह (Flow) बना रहे और वह जम न सके।
यह घटना हमें सिखाती है कि प्रकृति में हर नियम के कुछ अपवाद होते हैं। पानी का यह फैलाना जहाँ हमारे प्लंबिंग सिस्टम (Plumbing System) के लिए सिरदर्द है, वहीं यह पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। विज्ञान के ये सरल नियम हमारे घरों की बनावट और हमारे अस्तित्व की गहराई से जुड़े हुए हैं।