पेंसिल की लिखावट मिटाने की प्रक्रिया घर्षण (Friction) और चिपकने वाले गुणों (Adhesion) का एक बेहतरीन खेल है। पेंसिल की नोक ग्रेफाइट (Graphite) और मिट्टी से बनी होती है। जब हम कागज पर लिखते हैं, तो ग्रेफाइट के छोटे कण कागज के रेशों (Fibers) के बीच फंस जाते हैं और अपनी छाप छोड़ देते हैं। ये कण कागज से बहुत मजबूती से नहीं जुड़े होते, केवल सतह पर टिके रहते हैं।
रबर (Eraser) प्राकृतिक रबर या सिंथेटिक मटेरियल जैसे विनाइल (Vinyl) से बना होता है, जो ग्रेफाइट के प्रति बहुत अधिक आकर्षित (Attractive) होता है। जब हम कागज पर रबर रगड़ते हैं, तो पैदा होने वाली ऊष्मा और दबाव ग्रेफाइट के कणों को कागज के रेशों से बाहर निकाल देते हैं। ग्रेफाइट के ये कण कागज के बजाय रबर की सतह पर चिपक जाते हैं क्योंकि रबर अधिक 'चिपचिपा' (Sticky) होता है।
जैसे-जैसे हम रगड़ते हैं, रबर घिसकर छोटे-छोटे टुकड़ों (Eraser crumbs) के रूप में बाहर निकलता है, जो अपने साथ ग्रेफाइट की गंदगी को भी बाहर ले जाते हैं। इस तरह कागज की सतह फिर से साफ हो जाती है। यह पूरी प्रक्रिया भौतिक विज्ञान (Physics) के 'सतह तनाव' और घर्षण के सिद्धांतों पर आधारित है। यदि रबर बहुत कठोर हो, तो वह कागज को फाड़ भी सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि पेन की स्याही (Ink) को मिटाना मुश्किल होता है क्योंकि स्याही तरल रूप में होती है और वह कागज के रेशों के भीतर तक समा जाती है। पेंसिल का ग्रेफाइट केवल ऊपरी सतह पर होता है, इसलिए उसे हटाना आसान है। पुराने समय में रबर के आविष्कार से पहले लोग ब्रेड (Bread) के टुकड़ों का उपयोग पेंसिल मिटाने के लिए करते थे।
आधुनिक रबर को और भी प्रभावी बनाने के लिए उनमें तेल और सल्फर जैसे पदार्थ मिलाए जाते हैं। यह छोटी सी स्टेशनरी वस्तु (Stationery item) हमें सिखाती है कि कैसे अलग-अलग पदार्थों के बीच का आकर्षण बल दैनिक कार्यों को आसान बनाता है। कागज का साफ होना केवल एक सफाई की क्रिया नहीं, बल्कि आणविक स्तर पर होने वाला एक विस्थापन (Displacement) है।