रोटी के फूलने के पीछे का मुख्य वैज्ञानिक कारण 'भाप का दबाव' (Steam Pressure) और आटे में मौजूद एक प्रोटीन है जिसे 'ग्लूटेन' (Gluten) कहा जाता है। जब हम गेहूँ के आटे को पानी के साथ गूंथते हैं, तो उसमें लचीले रेशों का एक जाल बन जाता है। यह ग्लूटेन रोटी को एक संरचना प्रदान करता है जो गैस या हवा को अपने भीतर रोकने (Trap) में सक्षम होती है।
जब बेली हुई कच्ची रोटी को गर्म तवे पर डाला जाता है, तो तवे की गर्मी से आटे के भीतर मौजूद नमी (Moisture) भाप में बदलने लगती है। रोटी की निचली और ऊपरी सतह गर्म होकर सूख जाती है और एक पतली 'पपड़ी' या लेयर बना लेती है। यह दो परतें भाप के लिए एक बंद कमरे (Enclosure) की तरह काम करती हैं। भाप बाहर निकलने की कोशिश करती है, लेकिन लचीली ग्लूटेन की परतों के कारण वह बीच में ही फंस जाती है।
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, भाप का दबाव (Pressure) भी बढ़ता जाता है। यह दबाव रोटी की दो परतों को एक-दूसरे से अलग कर देता है और रोटी गुब्बारे की तरह फूल उठती है। रोटी के भीतर की यह भाप ही वास्तव में उसे अंदर से पकाती है, जिससे वह नरम (Soft) बनी रहती है। यदि रोटी में कोई छेद हो जाए, तो भाप बाहर निकल जाएगी और रोटी पूरी तरह नहीं फूलेगी।
आटे का सही तरीके से गूंथा जाना भी बहुत जरूरी है। यदि आटा बहुत कड़ा होगा, तो उसमें लचीलापन कम होगा और भाप परतों को अलग नहीं कर पाएगी। वहीं, यदि आटा बहुत गीला होगा, तो पपड़ी सही से नहीं बनेगी। रोटी का फूलना इस बात का प्रमाण है कि वह चारों तरफ से समान रूप से पक रही है और उसके भीतर पर्याप्त नमी मौजूद है।
यह रसोई में होने वाला एक छोटा 'थर्मोडायनामिक' प्रयोग है। भाप का विस्तार (Steam Expansion) रोटी को केवल आकार ही नहीं देता, बल्कि उसे खाने योग्य और सुपाच्य भी बनाता है। गेहूँ के अलावा अन्य अनाज जैसे मक्का या बाजरा की रोटियां इतनी आसानी से नहीं फूलतीं क्योंकि उनमें ग्लूटेन की मात्रा बहुत कम होती है। यह गेहूँ के आटे की विशिष्ट वैज्ञानिक खूबी है।