दुनिया के अधिकांश पदार्थ गर्म (Heat) करने पर पिघलते हैं, लेकिन अंडा (Egg) इसके विपरीत व्यवहार करता है। अंडे के भीतर मुख्य रूप से पानी और प्रोटीन (Protein) का जटिल मिश्रण होता है। कच्चे अंडे में ये प्रोटीन के अणु (Molecules) लंबी धागे जैसी संरचनाओं में होते हैं जो आपस में उलझे हुए और मुड़े हुए (Folded) होते हैं। इन्हें रासायनिक भाषा में गोलाकार प्रोटीन (Globular Proteins) कहा जाता है जो तरल अवस्था में तैरते रहते हैं।
जब अंडे को उबलते पानी (Boiling Water) में डाला जाता है, तो ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) इन प्रोटीन के अणुओं के बीच के कमजोर बंधनों (Chemical Bonds) को तोड़ देती है। इस प्रक्रिया को विप्रकृतिकरण (Denaturation) कहते हैं। इसके बाद ये प्रोटीन के धागे खुल जाते हैं और अपनी मूल आकृति खो देते हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, ये खुले हुए धागे एक-दूसरे के साथ नए और मजबूत बंधन बनाने लगते हैं।
प्रोटीन के अणुओं का यह नया जाल (Network) अंडे के भीतर मौजूद पानी के अणुओं को अपने बीच में फँसा लेता है। इस रासायनिक क्रिया (Chemical Reaction) के कारण ही अंडे का सफेद हिस्सा (Egg White) और जर्दी (Yolk) सख्त होकर ठोस द्रव्यमान (Solid Mass) में बदल जाते हैं। यह एक अपरिवर्तनीय प्रक्रिया (Irreversible Process) है, जिसका अर्थ है कि एक बार उबलने के बाद अंडे को फिर से तरल नहीं बनाया जा सकता।
जर्दी का जमना सफेद हिस्से की तुलना में थोड़े अधिक तापमान (Temperature) पर होता है क्योंकि उसमें वसा (Fat) की मात्रा अधिक होती है। अंडे को बहुत अधिक देर तक उबालने से उसमें मौजूद सल्फर (Sulphur) और लोहा (Iron) प्रतिक्रिया करके जर्दी के चारों ओर एक हरा घेरा बना देते हैं। यह शुद्ध रूप से रसायन विज्ञान (Chemistry) का एक प्रयोग है जो हमारी रसोई (Kitchen) में हर रोज होता है।
तापमान का सही नियंत्रण (Temperature Control) अंडे की बनावट को तय करता है। कम समय तक उबालने पर अंडा अधपका (Soft Boiled) रहता है क्योंकि तब तक सभी प्रोटीन के बंधन पूरी तरह नहीं जुड़ते। अंडे का सख्त होना जैव-रसायन विज्ञान (Biochemistry) की एक महत्वपूर्ण घटना है जो हमें बताती है कि गर्मी कैसे सूक्ष्म स्तर (Microscopic Level) पर पदार्थों की अवस्था को बदल सकती है।