भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) की परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय (Recognized University) से स्नातक की डिग्री (Bachelor's Degree) होना अनिवार्य है। जो छात्र अपने स्नातक स्तर के अंतिम वर्ष (Final Year) में हैं, वे भी प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) के लिए आवेदन कर सकते हैं। डिग्री किसी भी विषय जैसे कला, विज्ञान या वाणिज्य (Arts, Science, or Commerce) में हो सकती है, क्योंकि यूपीएससी केवल उत्तीर्ण होने का प्रमाण मांगता है।
आयु सीमा (Age Limit) की बात करें तो सामान्य श्रेणी (General Category) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष निर्धारित है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आयु में तीन वर्ष की छूट मिलती है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के अभ्यर्थियों को पांच वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान की जाती है। आयु की गणना (Calculation of Age) आमतौर पर परीक्षा वर्ष की एक अगस्त से की जाती है।
प्रयासों की संख्या (Number of Attempts) पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। एक सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार अपने जीवनकाल में अधिकतम छह (6) बार यह परीक्षा दे सकता है। ओबीसी श्रेणी (OBC Category) के लिए यह सीमा नौ (9) प्रयासों की है, जबकि एससी/एसटी वर्ग के लिए प्रयासों की कोई निश्चित सीमा नहीं है, वे आयु सीमा तक परीक्षा दे सकते हैं। शारीरिक रूप से विकलांग (Physically Disabled) उम्मीदवारों को भी नियमों के अनुसार विशेष लाभ मिलता है।
राष्ट्रीयता (Nationality) के संदर्भ में, आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) पदों के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक (Citizen of India) होना अनिवार्य है। अन्य सेवाओं के लिए नेपाल, भूटान या तिब्बती शरणार्थी भी कुछ शर्तों के साथ पात्र हो सकते हैं। चिकित्सा मानकों (Medical Standards) का पालन करना भी जरूरी है, विशेषकर उन सेवाओं के लिए जिनमें शारीरिक दक्षता (Physical Efficiency) की आवश्यकता होती है।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को यह समझना चाहिए कि शैक्षिक योग्यता में अंकों का कोई न्यूनतम प्रतिशत (Minimum Percentage) आवश्यक नहीं है। यदि आप केवल पासिंग मार्क्स (Passing Marks) के साथ स्नातक हैं, तब भी आप देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में बैठने के योग्य माने जाते हैं। आपकी मानसिक क्षमता (Mental Ability) और विश्लेषणात्मक सोच का परीक्षण लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से किया जाता है।