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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा ग्रुप डी और एनटीपीसी पदों के लिए जारी किया जाने वाला कट-ऑफ (Cut-off) बहुत ही विस्तृत होता है। यह कट-ऑफ अलग-अलग रेलवे जोन (Railway Zones) जैसे उत्तर रेलवे या पश्चिम रेलवे के लिए भिन्न होता है। पदों की संख्या और उस क्षेत्र से प्राप्त कुल आवेदनों (Total Applications) के अनुपात में अंकों का निर्धारण किया जाता है। रेलवे की परीक्षा में लाखों की संख्या में अभ्यर्थी बैठते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यंत कठिन (Tough Competition) हो जाता है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के अंकों को नॉर्मलाइजेशन (Normalization) प्रक्रिया के माध्यम से संशोधित किया जाता है। रेलवे अक्सर पर्सेंटाइल स्कोर (Percentile Score) का उपयोग करता है ताकि विभिन्न पालियों के बीच निष्पक्षता बनी रहे। सामान्य वर्ग (General Category) के लिए सुरक्षित स्कोर अक्सर 70 से 75 अंकों के आसपास रहता है, जबकि तकनीकी पदों (Technical Posts) के लिए यह थोड़ा कम हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए भी अब अलग से कट-ऑफ जारी किया जाता है।

शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या रिक्तियों से तीन गुना अधिक होती है। इसका मतलब है कि पीईटी के लिए कट-ऑफ थोड़ा नीचे रहता है, लेकिन अंतिम चयन (Final Selection) के लिए आपको मुख्य कट-ऑफ से 5-6 अंक अधिक लाने की आवश्यकता होती है। रेलवे भर्ती (Railway Recruitment) में नकारात्मक अंकन (Negative Marking) एक-तिहाई (1/3) होता है, इसलिए गलतियों से बचना बहुत जरूरी है। सटीक उत्तर देना ही मेरिट में आने की कुंजी है।

भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) और अप्रेंटिस (Apprentices) के लिए रेलवे में विशेष कोटा होता है, जिसके कारण उनका कट-ऑफ न्यूनतम अर्हता अंकों (Qualifying Marks) के करीब ही रहता है। विकलांग श्रेणियों (PwBD) के लिए भी पदों की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग अंक निर्धारित किए जाते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर परिणाम के साथ विस्तृत स्कोरकार्ड (Scorecard) जारी करता है, जहाँ आप अपने नॉर्मलाइज्ड अंक देख सकते हैं।

दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination) के बाद एक अंतिम पैनल (Final Panel) तैयार किया जाता है। यदि कोई अभ्यर्थी मेडिकल में अनफिट होता है, तो मेरिट में नीचे वाले उम्मीदवार को मौका मिल सकता है। रेलवे की नौकरी में स्थिरता (Stability) होने के कारण अभ्यर्थी अधिकतम प्रयास करते हैं। पिछले वर्षों के कट-ऑफ का अध्ययन करने से तैयारी की दिशा (Direction of Preparation) तय करने में मदद मिलती है।

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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा ग्रुप डी और एनटीपीसी पदों के लिए जारी किया जाने वाला कट-ऑफ (Cut-off) बहुत ही विस्तृत होता है। यह कट-ऑफ अलग-अलग रेलवे जोन (Railway Zones) जैसे उत्तर रेलवे या पश्चिम रेलवे के लिए भिन्न होता है। पदों की संख्या और उस क्षेत्र से प्राप्त कुल आवेदनों (Total Applications) के अनुपात में अंकों का निर्धारण किया जाता है। रेलवे की परीक्षा में लाखों की संख्या में अभ्यर्थी बैठते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यंत कठिन (Tough Competition) हो जाता है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के अंकों को नॉर्मलाइजेशन (Normalization) प्रक्रिया के माध्यम से संशोधित किया जाता है। रेलवे अक्सर पर्सेंटाइल स्कोर (Percentile Score) का उपयोग करता है ताकि विभिन्न पालियों के बीच निष्पक्षता बनी रहे। सामान्य वर्ग (General Category) के लिए सुरक्षित स्कोर अक्सर 70 से 75 अंकों के आसपास रहता है, जबकि तकनीकी पदों (Technical Posts) के लिए यह थोड़ा कम हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए भी अब अलग से कट-ऑफ जारी किया जाता है।

शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या रिक्तियों से तीन गुना अधिक होती है। इसका मतलब है कि पीईटी के लिए कट-ऑफ थोड़ा नीचे रहता है, लेकिन अंतिम चयन (Final Selection) के लिए आपको मुख्य कट-ऑफ से 5-6 अंक अधिक लाने की आवश्यकता होती है। रेलवे भर्ती (Railway Recruitment) में नकारात्मक अंकन (Negative Marking) एक-तिहाई (1/3) होता है, इसलिए गलतियों से बचना बहुत जरूरी है। सटीक उत्तर देना ही मेरिट में आने की कुंजी है।

भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) और अप्रेंटिस (Apprentices) के लिए रेलवे में विशेष कोटा होता है, जिसके कारण उनका कट-ऑफ न्यूनतम अर्हता अंकों (Qualifying Marks) के करीब ही रहता है। विकलांग श्रेणियों (PwBD) के लिए भी पदों की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग अंक निर्धारित किए जाते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर परिणाम के साथ विस्तृत स्कोरकार्ड (Scorecard) जारी करता है, जहाँ आप अपने नॉर्मलाइज्ड अंक देख सकते हैं।

दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination) के बाद एक अंतिम पैनल (Final Panel) तैयार किया जाता है। यदि कोई अभ्यर्थी मेडिकल में अनफिट होता है, तो मेरिट में नीचे वाले उम्मीदवार को मौका मिल सकता है। रेलवे की नौकरी में स्थिरता (Stability) होने के कारण अभ्यर्थी अधिकतम प्रयास करते हैं। पिछले वर्षों के कट-ऑफ का अध्ययन करने से तैयारी की दिशा (Direction of Preparation) तय करने में मदद मिलती है।
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