प्रतिशत (Percentage) का अर्थ है 'प्रत्येक सौ पर' और यह गणित (Mathematics) का सबसे आधारभूत अध्याय है जो लगभग हर सरकारी परीक्षा में पूछा जाता है। पटवारी (Patwari) की नौकरी में भूमि के माप या कर (Tax) की गणना करने के लिए प्रतिशत का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। जब हम किसी संख्या को प्रतिशत में बदलते हैं, तो उसे 100 से गुणा (Multiplication) करते हैं और प्रतिशत को हटाने के लिए 100 से भाग (Division) दिया जाता है। इस विषय की अच्छी समझ होने से आप जटिल गणनाओं (Complex Calculations) को बहुत ही सरल बना सकते हैं।
परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि यदि किसी वस्तु की कीमत में कुछ प्रतिशत की वृद्धि (Increase) हो जाए, तो खपत में कितनी कमी (Decrease) करनी होगी। ऐसे सवालों को हल करने के लिए भिन्न (Fraction) विधि का उपयोग करना सबसे तेज तरीका माना जाता है। उदाहरण के लिए, 25% को भिन्न के रूप में 1/4 लिखा जा सकता है। यह तकनीक समय प्रबंधन (Time Management) में बहुत सहायक होती है क्योंकि इससे बड़े गुणा-भाग से बचा जा सकता है।
डाक विभाग (Post Office) की भर्ती में ब्याज दरों (Interest Rates) की गणना के लिए प्रतिशत का बहुत अधिक उपयोग होता है। बचत योजनाओं (Saving Schemes) पर मिलने वाले लाभ को समझने के लिए आपको शुद्ध लाभ (Net Profit) का प्रतिशत निकालना आना चाहिए। प्रतिशत का उपयोग केवल गणित के एक अध्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाभ और हानि (Profit and Loss) तथा आंकड़ों की व्याख्या (Data Interpretation) की भी नींव है। अभ्यास के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 प्रतिशत आधारित प्रश्नों को हल करना चाहिए।
रेलवे (Railway) की परीक्षाओं में जनसंख्या वृद्धि (Population Growth) या किसी मशीन के मूल्यह्रास (Depreciation) से संबंधित प्रतिशत के सवाल अक्सर देखे जाते हैं। इनमें चक्रवर्ती ब्याज (Compound Interest) के सूत्रों का भी कुछ अंश शामिल होता है। प्रश्नों को हल करते समय इकाइयों (Units) का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप प्रतिशत के मूल सिद्धांतों (Basic Principles) को एक बार ठीक से समझ लेते हैं, तो आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam) में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।
अंगूठा नियम के रूप में, प्रतिशत के कठिन सवालों को हल करने के लिए हमेशा आधार संख्या (Base Number) को 100 मान लेना चाहिए। इससे गणना (Calculation) की सटीकता (Accuracy) बढ़ जाती है और गलती होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है। डिजिटल इंडिया (Digital India) के इस दौर में डेटा विश्लेषण (Data Analysis) के लिए भी प्रतिशत का ज्ञान अनिवार्य है। नियमित रिविजन (Regular Revision) और विभिन्न प्रकार के अभ्यास पत्रों (Practice Papers) का उपयोग करने से इस विषय पर पकड़ मजबूत होती है।