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री-टेस्टिंग (Re-testing) एक बहुत ही केंद्रित प्रक्रिया है जो तब की जाती है जब किसी विशेष बग (Bug) को ठीक कर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सत्यापित (Verify) करना है कि जिस दोष (Defect) की रिपोर्ट की गई थी, वह अब वास्तव में सुलझ गया है। इसमें टेस्टर (Tester) केवल उन्हीं चरणों (Steps) को फिर से दोहराता है जहाँ पहले असफलता (Failure) मिली थी। यह सुनिश्चित करता है कि फिक्स (Fix) सही ढंग से काम कर रहा है।

रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) का दायरा री-टेस्टिंग से कहीं अधिक व्यापक होता है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि नए कोड (Code) के बदलाव या बग फिक्स (Bug Fix) के कारण सॉफ्टवेयर के पुराने और स्थिर हिस्से (Stable Parts) प्रभावित तो नहीं हुए। अक्सर एक जगह सुधार करने से दूसरी जगह अनचाही समस्याएं (Side Effects) पैदा हो जाती हैं। यह परीक्षण पूरे सिस्टम की अखंडता (Integrity) को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

इन दोनों के समय और स्थिति (Situation) में भी बड़ा अंतर होता है। री-टेस्टिंग (Re-testing) हमेशा रिग्रेशन से पहले की जाती है। जब तक यह पुख्ता नहीं हो जाता कि बग (Bug) ठीक हो गया है, तब तक रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) शुरू करने का कोई लाभ नहीं है। री-टेस्टिंग केवल विफल टेस्ट केस (Failed Test Cases) पर की जाती है, जबकि रिग्रेशन में उन टेस्ट केसेस (Test Cases) को भी चलाया जाता है जो पहले सफल (Passed) रहे थे।

प्रक्रियात्मक दृष्टिकोण (Procedural Approach) से देखें तो री-टेस्टिंग (Re-testing) को ऑटोमेट (Automate) करना कठिन होता है क्योंकि यह हर बार नए बग (Bug) पर आधारित होती है। इसके विपरीत, रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) ऑटोमेशन (Automation) के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें वही पुराने परीक्षण बार-बार दोहराए जाते हैं। हालांकि, मैन्युअल प्रक्रिया में भी रिग्रेशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सॉफ्टवेयर रिलीज (Release) से पहले ये दोनों प्रक्रियाएं एक साथ मिलकर काम करती हैं। री-टेस्टिंग (Re-testing) व्यक्तिगत सुधारों की पुष्टि करती है, जबकि रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) पूरे एप्लिकेशन (Application) के स्वस्थ होने का आश्वासन देती है। इन दोनों के बिना किसी भी सॉफ्टवेयर को उच्च गुणवत्ता वाला और विश्वसनीय (Reliable) नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये उपयोगकर्ता के लिए स्थिरता (Stability) सुनिश्चित करते हैं।

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री-टेस्टिंग (Re-testing) एक बहुत ही केंद्रित प्रक्रिया है जो तब की जाती है जब किसी विशेष बग (Bug) को ठीक कर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सत्यापित (Verify) करना है कि जिस दोष (Defect) की रिपोर्ट की गई थी, वह अब वास्तव में सुलझ गया है। इसमें टेस्टर (Tester) केवल उन्हीं चरणों (Steps) को फिर से दोहराता है जहाँ पहले असफलता (Failure) मिली थी। यह सुनिश्चित करता है कि फिक्स (Fix) सही ढंग से काम कर रहा है।

रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) का दायरा री-टेस्टिंग से कहीं अधिक व्यापक होता है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि नए कोड (Code) के बदलाव या बग फिक्स (Bug Fix) के कारण सॉफ्टवेयर के पुराने और स्थिर हिस्से (Stable Parts) प्रभावित तो नहीं हुए। अक्सर एक जगह सुधार करने से दूसरी जगह अनचाही समस्याएं (Side Effects) पैदा हो जाती हैं। यह परीक्षण पूरे सिस्टम की अखंडता (Integrity) को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

इन दोनों के समय और स्थिति (Situation) में भी बड़ा अंतर होता है। री-टेस्टिंग (Re-testing) हमेशा रिग्रेशन से पहले की जाती है। जब तक यह पुख्ता नहीं हो जाता कि बग (Bug) ठीक हो गया है, तब तक रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) शुरू करने का कोई लाभ नहीं है। री-टेस्टिंग केवल विफल टेस्ट केस (Failed Test Cases) पर की जाती है, जबकि रिग्रेशन में उन टेस्ट केसेस (Test Cases) को भी चलाया जाता है जो पहले सफल (Passed) रहे थे।

प्रक्रियात्मक दृष्टिकोण (Procedural Approach) से देखें तो री-टेस्टिंग (Re-testing) को ऑटोमेट (Automate) करना कठिन होता है क्योंकि यह हर बार नए बग (Bug) पर आधारित होती है। इसके विपरीत, रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) ऑटोमेशन (Automation) के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें वही पुराने परीक्षण बार-बार दोहराए जाते हैं। हालांकि, मैन्युअल प्रक्रिया में भी रिग्रेशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सॉफ्टवेयर रिलीज (Release) से पहले ये दोनों प्रक्रियाएं एक साथ मिलकर काम करती हैं। री-टेस्टिंग (Re-testing) व्यक्तिगत सुधारों की पुष्टि करती है, जबकि रिग्रेशन टेस्टिंग (Regression Testing) पूरे एप्लिकेशन (Application) के स्वस्थ होने का आश्वासन देती है। इन दोनों के बिना किसी भी सॉफ्टवेयर को उच्च गुणवत्ता वाला और विश्वसनीय (Reliable) नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये उपयोगकर्ता के लिए स्थिरता (Stability) सुनिश्चित करते हैं।
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