दिमाग में अच्छे ideas होना एक बड़ी ताकत है, लेकिन उन्हें बोलने में hesitation आती है तो ये lack of confidence का संकेत होता है। ये डर इसलिए होता है कि कहीं लोग आपकी बात को गलत न समझ लें। लेकिन ideas shared करने से आप सीखते भी हैं और grow भी करते हैं। इसलिए शुरुआत छोटी जगहों से करें।
जब कोई discussion चल रहा हो तो छोटी line बोलकर start करें। एक पूरा लंबा idea बोलना जरूरी नहीं। छोटे-छोटे points से दिमाग risk कम महसूस करता है। कुछ समय बाद आप naturally लंबे ideas भी आराम से बोल पाएंगे। confidence इसी process में बढ़ता है।
अपने ideas को घर पर या अकेले में बोलकर practice करें। mind rehearsal को बहुत महत्व देता है। जब आप पहले से practice करते हैं, तो public में बोलते समय hesitancy कम हो जाती है। इससे आपकी delivery भी smooth होती है।
अपनी knowledge को थोड़ा stable रखें। जितना आप prepared रहेंगे उतना mind calm रहेगा। जब दिमाग को लगता है कि आप topic समझते हैं तो बोलना आसान हो जाता है। preparation confidence को triple कर देती है।
बोलने के बाद खुद को judge मत करें। बहुत लोग बोलने के बाद overthink करके confidence गिरा देते हैं। अपनी छोटी progress को notice करें। हर बार एक छोटा कदम आपके अंदर बड़ा बदलाव लाता है। धीरे-धीरे आप खुद को bold और confident महसूस करेंगे।