भारतीय छात्रों में मातृभाषा का प्रभाव (Mother Tongue Influence) होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे कम करना जरूरी है। अक्सर 's' के साथ शुरू होने वाले शब्दों, जैसे "School" या "Station", से पहले 'इ' की ध्वनि जोड़ना एक आम गलती है। इसे सुधारने के लिए शब्दों की शुरुआत की ध्वनि पर विशेष ध्यान दें। अपनी क्षेत्रीय बोलियों (Regional Dialects) के असर को धीरे-धीरे कम करना ही लक्ष्य होना चाहिए।
व्यंजनों के गुच्छों (Consonant Clusters) का उच्चारण करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। जैसे "Months" या "Clothes" के अंत में आने वाली ध्वनियों को अक्सर छात्र अधूरा छोड़ देते हैं। प्रत्येक अक्षर को उसकी पूरी ध्वनि (Full Sound) देना सुनिश्चित करें। शब्दों के अंत को स्पष्ट रूप से बोलना आपकी अंग्रेजी को उच्च स्तर (Advanced Level) पर ले जाता है।
मूक अक्षरों (Silent Letters) के प्रति बहुत सावधान रहें। अंग्रेजी में कई शब्द ऐसे हैं जिनमें कुछ अक्षर लिखे तो जाते हैं पर बोले नहीं जाते, जैसे "Knife" में 'K' या "Receipt" में 'P'। इन शब्दों की एक सूची बनाएं और इनका नियमित अभ्यास करें। मूक अक्षरों को बोलना आपके उच्चारण को गलत (Incorrect) और नौसिखिया जैसा बना सकता है।
स्वर ध्वनियों (Vowel Sounds) की लंबाई पर ध्यान दें। लंबी और छोटी स्वर ध्वनियों के बीच का अंतर शब्द का अर्थ बदल सकता है। उदाहरण के लिए, "Pool" और "Pull" के उच्चारण में अंतर है। इन ध्वनियों के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity) विकसित करना आपके सुनने (Listening) और बोलने (Speaking) दोनों कौशलों में सुधार लाएगा।
दर्पण के सामने अभ्यास (Mirror Practice) करने से आप अपने चेहरे की मांसपेशियों के संचालन को देख सकते हैं। सही उच्चारण के लिए आपके चेहरे की बनावट और हवा का प्रवाह (Airflow) बहुत मायने रखता है। यह शारीरिक अभ्यास (Physical Practice) आपको शब्दों को अधिक स्पष्टता के साथ बाहर निकालने में मदद करता है। धैर्य और निरंतरता ही इन त्रुटियों को दूर करने की कुंजी है।