प्राणेश चौधरी और सुशांत सचान ने ज़नपल्स (ZunPulse) की शुरुआत भारतीय घरों को अधिक ऊर्जावान और जागरूक (Aware) बनाने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने देखा कि घरों में बिजली की बर्बादी (Electricity Wastage) का एक बड़ा कारण उपकरणों का खराब प्रबंधन है। उन्होंने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित उत्पादों की एक श्रृंखला विकसित की जो घर के पंखों, एसी (AC) और लाइटों को स्मार्ट बना देती है। इस तकनीक (Technology) ने आम नागरिकों को अपने मोबाइल फोन से बिजली खपत (Power Consumption) को नियंत्रित करने की शक्ति दी।
इस हरित स्टार्टअप (Green Startup) की सफलता का राज उनकी 'स्मार्ट एनर्जी मॉनिटरिंग' (Smart Energy Monitoring) तकनीक में है। उनका डिवाइस (Device) घर के मुख्य स्विच से जुड़ जाता है और हर उपकरण द्वारा ली जाने वाली बिजली का रीयल-टाइम डेटा (Real-time Data) देता है। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिली कि कहाँ बिजली फालतू खर्च हो रही है और वे अपने बिलों (Bills) को 20-30% तक कम करने में सफल रहे। यह न केवल पैसे की बचत थी, बल्कि पर्यावरण (Environment) के लिए भी बहुत फायदेमंद था।
विकास की दिशा में उन्हें कई एंजेल निवेशकों (Angel Investors) और वेंचर कैपिटल (Venture Capital) फर्मों से फंडिंग (Funding) मिली। उन्होंने केवल उपकरणों तक सीमित न रहकर 'ज़नसोलर' (ZunSolar) के माध्यम से सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया को बहुत सरल और किफायती बना दिया। तकनीक (Technology) के इस एकीकरण (Integration) ने उन्हें घरेलू ऊर्जा प्रबंधन (Home Energy Management) में एक बड़ा ब्रांड बना दिया।
उनकी मार्केटिंग रणनीति (Marketing Strategy) पूरी तरह से 'बचत और सुविधा' पर आधारित रही है। उन्होंने अमेज़न (Amazon) और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स (E-commerce) चैनलों का उपयोग करके अपने उत्पादों को भारत के छोटे शहरों तक पहुँचाया। उनके स्मार्ट प्लग (Smart Plugs) और स्मार्ट बल्ब (Smart Bulbs) बहुत लोकप्रिय हुए क्योंकि वे सामान्य घरों को बिना किसी बड़ी तोड़फोड़ के स्मार्ट होम (Smart Home) में बदल देते थे। उन्होंने डेटा (Data) की सुरक्षा और गोपनीयता (Privacy) को भी बहुत गंभीरता से लिया।
आज ज़नपल्स लाखों घरों को ऊर्जा कुशल (Energy Efficient) बना चुका है और कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) को कम करने में मदद कर रहा है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि छोटे-छोटे तकनीकी बदलाव भी पर्यावरण (Environment) पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने तकनीक (Technology) को आम आदमी के बजट में लाकर स्थिरता (Sustainability) को एक नया आयाम दिया है। यह स्टार्टअप (Startup) डिजिटल इंडिया और ग्रीन इंडिया का एक बेहतरीन संगम है।