लोहड़ी की एक बहुत ही प्यारी और पुरानी परंपरा (Ancient Tradition) बच्चों द्वारा टोलियाँ बनाकर लोहड़ी मांगना है। इस दौरान बच्चे छोटे-छोटे और लयबद्ध गीत (Rhythmic Songs) गाते हैं जिन्हें सुनकर बड़े-बुजुर्ग प्रसन्न हो जाते हैं। इन गीतों में अक्सर शगुन मांगने और बदले में आशीर्वाद देने की बात कही जाती है। "दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी" जैसे गीत सबसे अधिक प्रचलित हैं, जिनका अर्थ है कि माँ हमें लोहड़ी दो और ईश्वर आपकी जोड़ी को हमेशा सलामत रखे।
बच्चे अपने साथ थैले लेकर चलते हैं और हर घर के सामने खड़े होकर पूरे उत्साह के साथ गीत (Lohri Songs) सुनाते हैं। यदि कोई घरवाला लोहड़ी देने में देरी करता है, तो बच्चे प्यार भरे और मज़ाकिया गीत (Funny Songs) गाकर उन्हें चिढ़ाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया बच्चों में सामाजिकता (Socializing) और निडरता का भाव विकसित करती है। इन गीतों के माध्यम से बच्चों को अपनी क्षेत्रीय भाषा (Regional Language) और शब्दों का ज्ञान भी बहुत आसानी से हो जाता है।
"हुल्ले नी हुल्ले, दो मई हुल्ले" जैसे गीत भी बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं, जिनका संगीत बहुत ही सरल और आकर्षक होता है। इन गीतों (Songs) को गाते समय बच्चे लकड़ी के छोटे डंडों या अपनी तालियों का उपयोग लय बनाए रखने के लिए करते हैं। बदले में उन्हें मूंगफली, रेवड़ी, गज्जक और कभी-कभी पैसे (Money) भी मिलते हैं। यह रस्म केवल वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले में त्यौहार की गूँज (Echo) पहुँचाने के लिए निभाई जाती है।
सामाजिक स्तर पर यह परंपरा (Tradition) लोगों के बीच की दूरियों को कम करती है क्योंकि बच्चे हर घर में खुशियाँ लेकर पहुँचते हैं। बच्चों के ये मासूम गीत (Innocent Songs) कठोर हृदय वाले लोगों को भी पिघला देते हैं और वे खुशी-खुशी दान (Charity) करते हैं। लोहड़ी माँगने वाले इन गीतों का ऐतिहासिक संबंध दुल्ला भट्टी की यादों से ही जुड़ा हुआ है। यह बच्चों के लिए एक प्रकार का खेल (Game) भी है जिसे वे पूरे साल बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।
आजकल बड़े शहरों में यह परंपरा धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन पंजाब के छोटे कस्बों और गाँवों में यह आज भी जीवित (Alive) है। स्कूलों और सोसायटियों में अब बच्चों के लिए विशेष लोहड़ी गीत प्रतियोगिताएं (Lohri Song Competitions) आयोजित की जाती हैं। हमें इन गीतों को संरक्षित करने की आवश्यकता है क्योंकि ये हमारी लोक संस्कृति (Folk Culture) के सबसे मासूम और पवित्र अंग हैं। बच्चों की आवाज़ में लोहड़ी की ये धुनें पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती हैं।