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वर्ष 2026 में लोहड़ी (Lohri) का पावन त्यौहार 13 जनवरी, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। पंचांग (Panchang) की गणना के अनुसार, यह पर्व हमेशा मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से ठीक एक दिन पहले आता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने वाला होता है। इस साल लोहड़ी की अग्नि (Lohri Fire) प्रज्वलित करने का सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के बाद संध्याकाल में रहेगा। नक्षत्रों (Nakshatras) की स्थिति इस दिन को अत्यंत फलदायी और सौभाग्यशाली बना रही है, जो नई शुरुआत (New Beginnings) के लिए श्रेष्ठ है।

त्यौहार की तिथि (Date) का निर्धारण सौर कैलेंडर (Solar Calendar) के आधार पर किया जाता है, जिससे यह लगभग हर साल 13 या 14 जनवरी को ही पड़ता है। अलाव (Bonfire) जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5:45 बजे से रात 8:30 बजे के बीच सबसे प्रभावी माना जा रहा है। इस समय काल में पूजा (Puja) अर्चना करने से परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है। ग्रहों की चाल (Movement of Planets) इस बार कृषि और व्यापार जगत के लिए बहुत सकारात्मक संकेत दे रही है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, तिथि (Date) का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पौष माह के अंत और माघ माह के आगमन का संधिकाल है। 13 जनवरी की रात को साल की सबसे लंबी रात (Longest Night) के रूप में भी देखा जाता है, जिसके बाद दिन बड़े होने लगते हैं। शुभ मुहूर्त (Auspicious Time) में अग्नि को तिल और गुड़ (Sesame and Jaggery) अर्पित करना दोषों का निवारण करता है। इस समय किया गया दान-पुण्य और परिक्रमा (Circumambulation) जातक के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है।

पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों में इस तिथि (Date) को लेकर विशेष उत्साह रहता है क्योंकि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) से जुड़ा है। स्थानीय पंचांगों (Local Calendars) में भी 13 तारीख को ही प्रमुखता दी गई है ताकि लोग समय पर अपनी तैयारियां पूर्ण कर सकें। घरों में पकवान बनाने और मेहमानों को आमंत्रित करने के लिए यह तिथि और समय (Time) बहुत अनुकूल है। शुभ घड़ी में किया गया कोई भी कार्य लंबे समय तक शुभ फल (Good Results) प्रदान करता है।

अंततः, लोहड़ी की यह तारीख (Lohri Date) केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं है, बल्कि यह कड़ाके की ठंड की विदाई का उत्सव है। 13 जनवरी 2026 को पड़ने वाला यह त्यौहार उत्तर भारत के सभी समुदायों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगा। इस निश्चित तिथि (Fixed Date) पर अलाव की गर्माहट रिश्तों के बीच की दूरियों को मिटाने का काम करती है। त्यौहार के इस विशेष अवसर (Special Occasion) पर सही समय का पालन करना परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।

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वर्ष 2026 में लोहड़ी (Lohri) का पावन त्यौहार 13 जनवरी, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। पंचांग (Panchang) की गणना के अनुसार, यह पर्व हमेशा मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से ठीक एक दिन पहले आता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने वाला होता है। इस साल लोहड़ी की अग्नि (Lohri Fire) प्रज्वलित करने का सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के बाद संध्याकाल में रहेगा। नक्षत्रों (Nakshatras) की स्थिति इस दिन को अत्यंत फलदायी और सौभाग्यशाली बना रही है, जो नई शुरुआत (New Beginnings) के लिए श्रेष्ठ है।

त्यौहार की तिथि (Date) का निर्धारण सौर कैलेंडर (Solar Calendar) के आधार पर किया जाता है, जिससे यह लगभग हर साल 13 या 14 जनवरी को ही पड़ता है। अलाव (Bonfire) जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5:45 बजे से रात 8:30 बजे के बीच सबसे प्रभावी माना जा रहा है। इस समय काल में पूजा (Puja) अर्चना करने से परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है। ग्रहों की चाल (Movement of Planets) इस बार कृषि और व्यापार जगत के लिए बहुत सकारात्मक संकेत दे रही है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, तिथि (Date) का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पौष माह के अंत और माघ माह के आगमन का संधिकाल है। 13 जनवरी की रात को साल की सबसे लंबी रात (Longest Night) के रूप में भी देखा जाता है, जिसके बाद दिन बड़े होने लगते हैं। शुभ मुहूर्त (Auspicious Time) में अग्नि को तिल और गुड़ (Sesame and Jaggery) अर्पित करना दोषों का निवारण करता है। इस समय किया गया दान-पुण्य और परिक्रमा (Circumambulation) जातक के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है।

पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों में इस तिथि (Date) को लेकर विशेष उत्साह रहता है क्योंकि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) से जुड़ा है। स्थानीय पंचांगों (Local Calendars) में भी 13 तारीख को ही प्रमुखता दी गई है ताकि लोग समय पर अपनी तैयारियां पूर्ण कर सकें। घरों में पकवान बनाने और मेहमानों को आमंत्रित करने के लिए यह तिथि और समय (Time) बहुत अनुकूल है। शुभ घड़ी में किया गया कोई भी कार्य लंबे समय तक शुभ फल (Good Results) प्रदान करता है।

अंततः, लोहड़ी की यह तारीख (Lohri Date) केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं है, बल्कि यह कड़ाके की ठंड की विदाई का उत्सव है। 13 जनवरी 2026 को पड़ने वाला यह त्यौहार उत्तर भारत के सभी समुदायों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगा। इस निश्चित तिथि (Fixed Date) पर अलाव की गर्माहट रिश्तों के बीच की दूरियों को मिटाने का काम करती है। त्यौहार के इस विशेष अवसर (Special Occasion) पर सही समय का पालन करना परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।
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