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लोहड़ी की शाम को अलाव के चारों ओर बैठकर मूंगफली, रेवड़ी और गजक (Peanuts, Rewri and Gajak) खाना इस त्यौहार का सबसे लोकप्रिय मनोरंजन और रस्म है। ये खाद्य पदार्थ 'लोहड़ी का प्रसाद' कहलाते हैं और इनके बिना त्यौहार का आनंद अधूरा माना जाता है। मूंगफली को 'गरीबों का बादाम' (Almond of the Poor) कहा जाता है क्योंकि यह प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर होती है। रेवड़ी और गजक जो तिल और गुड़ से बनी होती हैं, कड़कती ठंड में शरीर को आवश्यक कैलोरी (Calories) और गर्माहट प्रदान करती हैं।

अग्नि में आहुति (Offerings in Fire) देने के लिए भी इन्हीं सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जहाँ लोग मुट्ठी भर मूंगफली और रेवड़ी आग में डालते हैं। यह क्रिया अग्नि देव का सम्मान करने और अपनी चिंताओं को स्वाहा करने का एक प्रतीकात्मक तरीका (Symbolic Way) है। परिक्रमा के दौरान इनका सेवन करना और दूसरों के साथ साझा करना सामाजिक समरसता (Social Harmony) का परिचय देता है। गजक की कुरकुराहट और गुड़ की सोंधी महक वातावरण को और भी अधिक उत्सवपूर्ण बना देती है।

इन स्नैक्स का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है क्योंकि ये सभी लंबे समय तक खराब नहीं होते और सर्दियों के अनुकूल (Winter Friendly) होते हैं। तिल की गजक हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बढ़ाने में मदद करती है, जबकि मूंगफली स्वस्थ वसा प्रदान करती है। ये उत्पाद स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों (Small Scale Industries) को भी बढ़ावा देते हैं, जो लोहड़ी के समय दिन-रात इन्हें तैयार करते हैं। इन्हें चबाना न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि यह लोगों को आपस में जोड़कर बातचीत (Conversation) का माध्यम भी बनता है।

बाज़ार में अब कई प्रकार की गजक उपलब्ध हैं, जैसे चिक्की, चॉकलेट गजक और ड्राई फ्रूट चिक्की (Dry Fruit Chikki), जो युवाओं को बहुत आकर्षित करती हैं। फिर भी, लकड़ी की आग पर भुनी हुई मूंगफली का स्वाद सबसे अलग और पारंपरिक (Traditional Taste) होता है। लोहड़ी पर उपहार के रूप में इन सामग्रियों की सुंदर टोकरी (Gift Basket) देना एक बहुत ही प्रचलित चलन है। यह त्यौहार के उल्लास को हर घर तक पहुँचाने का एक सरल और सुंदर तरीका है।

अंत में, मूंगफली और गजक का यह मेल हमें यह याद दिलाता है कि खुशियाँ सादी चीज़ों में भी छिपी हो सकती हैं। लोहड़ी की रात जब ढोल की थाप (Beats of Dhol) गूँजती है, तो ये छोटे-छोटे व्यंजन ऊर्जा के स्तर को बनाए रखते हैं। इनकी मिठास और गर्माहट हमारे रिश्तों को और भी अधिक प्रगाढ़ बनाती है। लोहड़ी का यह भोजन हमें प्रकृति के उपहारों का आनंद लेना और उनके प्रति कृतज्ञ (Grateful) होना सिखाता है।

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लोहड़ी की शाम को अलाव के चारों ओर बैठकर मूंगफली, रेवड़ी और गजक (Peanuts, Rewri and Gajak) खाना इस त्यौहार का सबसे लोकप्रिय मनोरंजन और रस्म है। ये खाद्य पदार्थ 'लोहड़ी का प्रसाद' कहलाते हैं और इनके बिना त्यौहार का आनंद अधूरा माना जाता है। मूंगफली को 'गरीबों का बादाम' (Almond of the Poor) कहा जाता है क्योंकि यह प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर होती है। रेवड़ी और गजक जो तिल और गुड़ से बनी होती हैं, कड़कती ठंड में शरीर को आवश्यक कैलोरी (Calories) और गर्माहट प्रदान करती हैं।

अग्नि में आहुति (Offerings in Fire) देने के लिए भी इन्हीं सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जहाँ लोग मुट्ठी भर मूंगफली और रेवड़ी आग में डालते हैं। यह क्रिया अग्नि देव का सम्मान करने और अपनी चिंताओं को स्वाहा करने का एक प्रतीकात्मक तरीका (Symbolic Way) है। परिक्रमा के दौरान इनका सेवन करना और दूसरों के साथ साझा करना सामाजिक समरसता (Social Harmony) का परिचय देता है। गजक की कुरकुराहट और गुड़ की सोंधी महक वातावरण को और भी अधिक उत्सवपूर्ण बना देती है।

इन स्नैक्स का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है क्योंकि ये सभी लंबे समय तक खराब नहीं होते और सर्दियों के अनुकूल (Winter Friendly) होते हैं। तिल की गजक हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बढ़ाने में मदद करती है, जबकि मूंगफली स्वस्थ वसा प्रदान करती है। ये उत्पाद स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों (Small Scale Industries) को भी बढ़ावा देते हैं, जो लोहड़ी के समय दिन-रात इन्हें तैयार करते हैं। इन्हें चबाना न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि यह लोगों को आपस में जोड़कर बातचीत (Conversation) का माध्यम भी बनता है।

बाज़ार में अब कई प्रकार की गजक उपलब्ध हैं, जैसे चिक्की, चॉकलेट गजक और ड्राई फ्रूट चिक्की (Dry Fruit Chikki), जो युवाओं को बहुत आकर्षित करती हैं। फिर भी, लकड़ी की आग पर भुनी हुई मूंगफली का स्वाद सबसे अलग और पारंपरिक (Traditional Taste) होता है। लोहड़ी पर उपहार के रूप में इन सामग्रियों की सुंदर टोकरी (Gift Basket) देना एक बहुत ही प्रचलित चलन है। यह त्यौहार के उल्लास को हर घर तक पहुँचाने का एक सरल और सुंदर तरीका है।

अंत में, मूंगफली और गजक का यह मेल हमें यह याद दिलाता है कि खुशियाँ सादी चीज़ों में भी छिपी हो सकती हैं। लोहड़ी की रात जब ढोल की थाप (Beats of Dhol) गूँजती है, तो ये छोटे-छोटे व्यंजन ऊर्जा के स्तर को बनाए रखते हैं। इनकी मिठास और गर्माहट हमारे रिश्तों को और भी अधिक प्रगाढ़ बनाती है। लोहड़ी का यह भोजन हमें प्रकृति के उपहारों का आनंद लेना और उनके प्रति कृतज्ञ (Grateful) होना सिखाता है।
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