मथुरा और बरसाना (Mathura and Barsana) की होली पूरी दुनिया में अपनी सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) के लिए जानी जाती है। यहाँ लठमार होली के साथ 'चरकुला' (Charkula) नृत्य का आयोजन किया जाता है, जो कला और संतुलन (Balance) का अद्भुत उदाहरण है। इस नृत्य में महिलाएँ अपने सिर पर लकड़ी के पिरामिड नुमा ऊँचे ढांचे पर जलते हुए दीपक (Lamp) रखकर नाचती हैं। यह प्रदर्शन देखने वालों को मंत्रमुग्ध (Spellbound) कर देता है और भक्ति भाव (Devotion) को प्रदर्शित करता है।
'रसिया' (Rasiya) गीतों की धुन पर किया जाने वाला समूह नृत्य (Group Dance) ब्रज की एक और प्रमुख विशेषता है। इन गीतों में राधा-कृष्ण (Radha-Krishna) के प्रेम प्रसंगों का वर्णन होता है, जिस पर ग्रामीण लोग ढोलक और मंजीरे की थाप पर झूमते हैं। यह नृत्य शैली अत्यंत सरल और हृदय को स्पर्श (Heart touching) करने वाली होती है। लोक संगीत (Folk Music) और नृत्य का यह मिलन प्राचीन परंपराओं (Ancient Traditions) को आज भी जीवंत बनाए हुए है।
ब्रज में 'मयूर नृत्य' (Peacock Dance) भी बहुत चाव से किया जाता है, जहाँ कलाकार मोर जैसे पंख पहनकर कृष्ण की लीलाओं का मंचन (Stage Play) करते हैं। यह नृत्य भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और प्रकृति (Nature) के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के समय यह नृत्य विशेष रूप से मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित किया जाता है। रंगों की फुहार (Splash of Colors) के बीच इन कलाकारों की प्रस्तुति उत्सव की गरिमा को कई गुना बढ़ा देती है।
क्षेत्रीय समुदायों द्वारा किया जाने वाला 'होरिया' नृत्य भी अपनी गति और जोश (Vigor) के लिए जाना जाता है। इसमें पुरुष और महिलाएँ टोली बनाकर गलियों में नाचते हुए निकलते हैं। लोक वेशभूषा (Traditional Attire) और हाथों में ढाल-लाठी लेकर किया जाने वाला यह नृत्य वीरता और उल्लास का प्रतीक है। यह सामाजिक एकजुटता (Social Solidarity) और सांस्कृतिक गर्व (Cultural Pride) को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है।
ब्रज का यह सांस्कृतिक वैभव (Cultural Grandeur) हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। होली के अवसर पर होने वाले ये नृत्य केवल मनोरंजन (Entertainment) नहीं हैं, बल्कि ये एक आध्यात्मिक अनुभव (Spiritual Experience) प्रदान करते हैं। विदेशी पर्यटक (Foreign Tourists) भी इन नृत्यों को देखने और इनमें शामिल होने के लिए भारी संख्या में पहुँचते हैं। यह उत्सव भारतीय लोक कला (Indian Folk Art) की वैश्विक पहचान को मज़बूत करता है।